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नोव्हेंबर, २०२४ पासूनच्या पोेस्ट दाखवत आहे

युद्ध का असर मंगलमय हो

गुरुवर्य मुझमें ऐसा क्या है जो कबीर जैसे बालक और योगेश्वर , महासेन जैसे युवकों में नहीं है। वो मंगल है वत्स , मंगल का काम है युद्ध और बुध का काम है व्यवहार । तो तुम में और महासेन में जो फरक है वो तुम समझ गए होंगे  और राहु के बिना समुद्रलांघन नहीं हो सकता इसलिए कबीर जो अभी बालक है और योगेश्वर जो अभी एक राजा बन चुका है दोनो के लिए राहु केतु एक ही दिशा में है और वहां दो रस्ते होते है क्योंकि योगेश्वर तुम्हारा अनुयाई या तुम्हारा शिष्य था तो वो भोगविलास राजा बन गया है । कबीर आगे मैत्रेई और महासेन से मिलेगा  क्योंकि दोनों की मातृभूमि या जुड़ाव इस दख्खन से है ।तो कबीर धर्मविलासी पंडित बनेगा । और जब तक तुम लौट आओगे योगेश्वर राजा है और महासेन के जाने के बाद और आने तक कबीर राजगुरु या अर्थशास्त्री बनेगा । तो यह भूमि में तुम जो कुछ भी करना चाहते थे उसकी नींव तुमने रख ली है। गुरुवर्य निसंदेह आप जो कह रहे है वो सभी सही हो लेकिन एक शंका से मुझे बाहर निकालने की सहायता करे कि यातकिंचित भी संधि के कारण अगर में न रहा तो क्या होगा । अपना कर्म किए बिना कोई भी तुम्हे न बुलाता है नहीं जाने देता है ग...

जब तक युद्ध होगा तुम्हे संसार नही बसाना है

बोलो मॅक्स , मेरे साथ तारा पीठ चलोगे. मेरे लिये तो अभी बहुत कूछ निभाना और कमाना बाकी है ऐसा नहीं लगता गुरुवर्य। और मेरे हिसाब से मेरे दादाजी भगत सिंह और नाना जी  नामदेव  जी के साथ इसी प्रांत में नरसी से घुमान तक ही मेरा काम है। आप को वैष्णव गुरु बनाया गया है। अब मुझे गुरु के नाते यह बताए कि एक माता और पिता में कौन ये ज्यादातर बोल सकता है की ये संतान मेरी नहीं है ! कबीर ये सवाल तुम्हारे मन में क्यू आया है ? क्योकी ये जाणणा चाहता है की तुम ऐसे प्रश्र्नो को स्वीकार कर के इस्का तोड बता सको . आप कब आये ,धन्यवाद गुरवर्य. कबीर ये रामानंद जी है उन्होंने ही मेरा चूनाव किया है. मतलब हम सही गलत के बिना is प्रश्न को कैसे समधान करोगे वैष्णव आचार्य? ज्यादातर  पिता ने अपने पुत्र को नकार या पिडा का दान दिया है . सूर्य ने छायापुत्र शनी को , शिव जी ने गणेश को , हिरण्याक्षिपू ने प्रल्हाद को , दुष्यंत ने शकुंतला पुत्र भरत को,  यह तक प्रथम दर्शी लाव कुश को राम जी ने क्या ये तुम्हे सही लगता है कबीर . तो आप ये कह रहे हो की माता कभी अपने पुत्र को दूर नाही करती आचार्य . यह भी सही नहीं है , ग...