पोस्ट्स

सप्टेंबर, २०२४ पासूनच्या पोेस्ट दाखवत आहे

international podcast day

प्रसंग  संभाजी आनी जुन्या मित्रांची भेट। मला माहित नवते की मनोज आनी संभाजी जे कधी कोलेजात भेटले नस्तील पण आज ते एकत्र एकाच फ्लैट मधे राहत होते । तसा मि आनी इतर सर्व लोक जे अम्हि एकत्र हाेतो ते सर्व रिकामे होते असे म्हणावे लागेल ,  काही वेळ असा होता की बाकी सर्व जण J1 आणायला गेले होते आणि मी व संभाजी जुन्या आठवणी जाग्या करत करत पुढील भविष्याची चिंता करत होतो . मग एक मुद्दा असा आला की काय होतो आपण आणि काय सध्या परिस्थिती आलीय. संभाजी एका बस स्टेशन मास्टर चा मुलगा आणि इंजिीअरिंगमध्ये तर तो एक व्यावसायिक बनण्याच्या दिशेने कार्यरत होता पण पुढे काय झाले माहीत नाही आणि तो पुण्यात होता माझीही परिस्थिती जवळ पास तशीच आणि तुलनेने अधिक बेकार होती. मग विषय निघाला की youtubers जे आहेत ते आपल्या देशात पैसे कमावणारे मोठे लोक दिसत आहेत आणि रणवीर अलाहाबदिया नावाच्या व्यक्तीच्या podcast बद्दल मी त्याला थोडेसे सांगू लागलो मग त्याने सावकाश पूर्वीचा इतिहास सांगून continue केले कि वेगवेगळ्या इतर एमटीव्ही शो , शार्क tank, त्यासारखेच podcast hi आयात केलेले साधन आहे जे मोठ्या लोकांना वापरण्याचे साधन आह...

आधुनिक काल की व्यवस्था

 अरे मैत्रेयी महासेन का पता चला की उसे पूर्व की जाने को कहा है रामानंद जी ने, तुम मिली थी पहले रामानंद जी से । नही मैं कुछ वक्त के लिए मेरे माताजी के घर goa गई थी। ठीक है अभी सामने हो तो बताओ मैत्रेई भैरव जी से कब मिली या आखिरी बातचीत हुई। जब घर पर थी तब ही आखिरी बार, कुछ एक माह पूर्व। किसी नई व्यव्स्था के बारे जानकारी मिली है तुम्हे। नही इस तरह की कोई बात नही हुई। किसी capacity planning की बात हो रही थी। हा महाराज aap को कैसे पता । कुछ विकास को गति देने के लिए हम भी ग्राहक होते है तो हम ही हैं जो ये चाहते हैं की किसी तरह इस मायाजाल को संभाल कर इस से होने वाली वैयक्तिक हानि और सामूहिक हानि से भारतीयों को और फिर हम से समर्पित लोगो को बचाना हमारा कर्तव्य हम समझते हैं। ये किस मायाजाल की बात हो रही है रामानंद जी। तुम कही प्रत्यक्ष पहुंचने से पहले तुम्हारा क्या पहुंचता है गिलगामेश? मेरा नाम, मेरा काम , मेरा संदेश , मेरी जानकारी , मेरे अगले काम की बात बहुत कुछ महाराज जी । उसे ही एक काले डिब्बे में तुमने डाला है वो क्या बोलते हो तुम internetwork,  समझ गया गुरुवर्य । तो भैरव जी इस पर ...

इंद्र के दो जमाता एक देवसेनापति एक असुराचार्य

राधे राधे वैष्णव आचार्य. अरे महसेन यहां कैसे आना हुआ। और योगेश्वर कहा है वो तुम्हारे साथ ही था ना। गिलगामेश अब योगेश्वर को उसका गृहस्थ जीवन प्रारंभ कर देना चाहिए इसलिए तुम्हें हम यहां मिलने आए है। बोलो ये जिम्मेदारी तुमने क्यों ली  कुछ चीजे सितारों में लिखी होती है, महासेन मुझे यह से तारापीठ जाना है ऐसा चंद्रशेखर जी ने कहा है। और रामानंद जी कहा है अभी ?? में एक सप्ताह पहले यही मिला था उनसे । वो यही एक विरशैव अनुयायी के साथ मुझे यहां ले आए थे । आगे तारापीठ से वापस लौट कर कब आना है ? मुझे अब गृहस्थ आश्रम से तो छुट्टी मिली है महासेन । मुझे ये कार्य सोपा गया है की इस भूमि से वरका की भूमि तक वायव्य दिशा , पश्चिम दिशा में हर वनवासी को राज्याभिषेक कराने के बाद वरका में मुझे मुरुगा या महासेन को येजिदी के राज्य का शासक बना के ही मुझे इस पवित्र धरा पर लौटने को कहा गया है। मेरे नाम से किसी राज्य का शासन जोड़ा जाए ये मेरा सौभाग्य होता गिलगामेश पर मुझे आग्नेय और पूर्व की और चार्वाक नीति और वैदिक धर्म को आधारित बौद्ध मत को प्रचार प्रसार के लिये कार्य करने का आदेश है। तो मुरुगा ही होगा फिर वो शास...

विनोदी कलाकार: आधुनिक चार्वाक

काय महासेन , बऱ्याच दिवसांनी दर्शन दिले देवळात येऊन . हा मित्र आणि महाराज आले होते म्हणून भक्त निवासात व्यवस्था करावी असे वाटले म्हणून त्यांना घेऊन आलोय . हे रामानंद गुरुजी आणि हा योगेश्वर . कुठून आलात . हम बगलामुखी के गाव से हैं , और में जगन्नाथ की भूमि पूरी से । धन्यवाद आपका इस पावन भूमि में अपने दर्शन और सानिध्य के लिए  गुरुवर्य , योगेश्वर कपड़ो से तो आप कोई नेता लग रहे हो।  हा महाराज में पूरी धाम का विधायक बना हु 4 साल पहले । गुरुवर्य  जैसा आपको पता हो आप अभी श्रीपद वल्लभ दिगंबर दत्तात्रेय और रेणुका माता के मंदिर में खड़े हो । भले ही ये ग्राम देवता बने है पर आपको इनका नाम और काम पता ही है। ये हमारे मानबिंदु है देवकुलिक जी एक भार्गव राम जी की माता है और एक विष्णुजी का अंशावतार है जो चंद्रवंश का जो त्रिकुट है उनका मध्यबिंदु है । मध्यबिंदु का मतलब गुरुजी ? चंद्रवश सुरू ब्रम्हा जी के अवतार चंद्रत्रेय से हुआ और शिव जी के अवतार दुर्वासा जी के शाप से प्रथम यदुवंश समाप्त हुआ । यही त्रिकुट चंद्रवंश का प्रारंभ और अंत है। समझ गया गुरुवर्य । यही नहीं परशुराम जी की जननी और विश्वाम...