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मे, २०२४ पासूनच्या पोेस्ट दाखवत आहे

क्षात्रधर्म के अर्वाचीन नियम

गिलगमेश जब मेने तुम्हे अपने बारे में बताया कि मेरे घर के और गांव के कलेश से दूर रहना ही बेहतर होगा इसलिए में यहां तक पहुंचा हु , तो तुम क्या सोचते हो उसके बारे में । में बहुत सोच सोच के थक चुका था योगेश्वर ठीक है जो कुछ स्मृति से श्रुति में आए वो तुम्हे मेरे वाणी से मिलेगा और पता नही अब जब में तुम्हे बताऊंगा तो उस में क्या बदलाव होंगे लेकिन याद रहे  दो मौसेरे भाई अगर लड़ रहे हो तो तुम्हे वहा चुप रहने में तुम्हारी भलाई है । बात समझ नही आई, कोई example ? ठीक है मानले तेरे गांव के पास एक धनी व्यक्ति ने अपने दो लड़कियों को सिखा कर काबिल बनाया की वो बिना किसी सहायता से अपना जीवन व्यतीत करे , पर जीवन बिना मोह के नही चलता , तो एक लड़की एक मुस्लिम व्यापारी से मोहित हो गई और इस धनी व्यक्ति को उसे दामाद बनाना पड़ा। दूसरी लड़की ने उच्चशीक्षा विभूषित पति पाया जो किसी शहर में नौकरी करता था और कायदे कानून का शिक्षक था । अब उन दोनो के बालक इस धनी व्यक्ति के घर आए और एक आम के पेड़ से आम तोड़ते वक्त उनका झगड़ा चालू हुआ अब बोलो तुम किसका साथ दोगे । में तो दोनो के झगड़े का मजा लूंगा गिलागमेश!!! Exact...

journey to Antarctica

मेरा और तुम सबका साथ यही तक हैं गिलगामेश, मुझे पता नही के ये सोमनाथ तुम से कुछ कह रहा है या नहीं पर तुम जिंदगी के सबसे बड़े अनुभव से कुछ समय कि दुरी पर हो , और ध्यान रहे असली योगी का काम ध्यान उपयोग सबको उपदेश देने का होता है आदेश तुम नही दे  सकते तुम ये जो आगे कहानी बनेगी उसके कारक हो कर्ता नही ये ध्यान रखना . हा ठाकुरजी ध्यान रखूंगा के यहा एक पुत्री के अपने पिता से मिलने के लिए ये आयोजन है और हम उस आयोजन में निम्मित मात्र है । यहा से दक्षिण ध्रुव यानी अंटार्कटिका तक कोई बाधा नहीं है गिलगामेश , जमीनी या भौतिक बाधाए नही पर जैसे धृतराष्ट्र को योगेश्वर भगवान ने अपने योग से उसके साथ हुए न्याय का अनुमान लगाया था वैसे तुम्हे समय आगे बढ़ कर सोचते रहना होगा , 3 युग में 3 योगियों ने समाज के हित का काम किया है ये आगे जो काम पड़ा है वो उतना बड़ा तो नही पर तुम्हे उनका स्मरण रहना चाहिए . आप शिव, हनुमान , और कृष्ण की बात कर रहे न ठाकुरजी , वो तो मुझे बचपन से याद है कि हर बाध्य समय में योगी अपने पूर्ण विश्वास से और क्षमता से कुछ ऐसा प्राप्त कर लेता है। ठीक समझे , तुम्हारा मित्र योगेश्वर कहा है ....

तुष्टिकरण और भेदभाव

तो तुम मिल लिए एक दूसरे को. मैने दोनो को फिर उकसाते हुए कहा , योगेश्वर  ये वही तुम्हारा नया दोस्त जो तुम्हे यहां नियोजन और तुम्हारे जन्म वंश की बाते तुम उसको बोल सकते हो पर ध्यान रहे इसका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है. हा ठाकुर जी मिला मैं गिलगमेश  से अभी वो ऑडिटोरियम में जरा जल्दी आया तब वो टूर और ट्रेवल का शौकीन लगता है और उसने मुझे मिलते ही वही पूछा जो आप बोल रहे थे, उत्तर भारत में कोण नही जानता जाति , धर्म , वंश, इनका ज्ञान पहले लिया जाता है यही सच है। और उस चीज का अनुमान नाम से भी होता है और अच्छा है यहा वर्णवाद नही है वरना योगेश्वर वहा भी अटक जाता, फिर क्या कहे भगवान जगन्नाथ के राज्य प्रदेश है वहा एक जगह सोमवंशी क्षत्रिय कहने वाले घर मैं जन्म लेकर यह शिवाजी महाराज की भूमि में नया मोड़ लेकर कैसा लग रहा है योगेश्वर ।  ये ऐसी बाते तुम ही बोल सकते हो गिलगामेश.वैसे भी योगेश्वर इंट्रोवर्ट है ऐसा मेरा मानना था तुम बताओ तुम्हे क्या लगा . हर एक को अपने दुःख बताके रोने वाला थोड़ी ना इंट्रोवर्ट होगा ठाकुरजी। लोग हमेशा सहानुभूति नहीं देते योगेश्वर बहुत जगह दहशत काम आती है । आगे से...