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जून, २०२४ पासूनच्या पोेस्ट दाखवत आहे

अनाहत से उपर उठो गिलगामेश

ठाकूरजी वो मुझे बहुत सालों बाद मिली थी । हम जब विजाग से पूरी की ओर जा रहें थे तो वो मुझे as a टूर गाइड मिली और महासेन और मैत्रेयी भी उससे घुल मिल गए थे पर फिर किशोरी ने अपने अभी के सभी परिस्थिति से मुझे अवगत कराया तो मुझे लगा कि समय निकल गया है और हम अब संसार को आगे नहीं बढ़ा सकेंगे क्योंकि डिग्री के बाद उसके पापा और वो मेरा शहर छोड़ के चले गए थे पर वो विजाग गए ये बहुत वर्षों बाद पता चला। और उसका एक boyfriend है जो क्रिस्चियन है और वो शादी करने वाले हैं। धन्यवाद इस संपूर्ण और इथमभूत वृतांत के लिए गिलगामेश , लगता है की वो तुम्हे फिर से याद दिलाना पड़ेगा जो तुम्हारे पास है उसपे ध्यान दो अपने अतीत का सामना करना होगा और उससे आगे निकलना होगा । अगर तुम्हे सच में किशोरी के लिए अभी कुछ लगाव हो रहा है तो वो लगाव जब वो एमपी छोड़ के जा रही थी तब कहा था ?? तब से अब तक जब वो तुम्हारे सामने नहीं आई तब तक कभी तुम्हे उसकी याद आई है। मनुष्य का ये स्वभाव है की कोई चीज वर्तमान में सामने हो तो वो भूत और भविष्य दोनो के बारे मे मकड़जाल बनाता है और वो चीज ही उसकी बाधा बनती हैं गिलगामेश , तुम्हे यहां लाने का ...

धर्म के 4 पैर

पर क्यों ठाकुरजी आपने खाना ही क्यों खिलाया उस बूढ़ी औरत को वो तो भीक मांग रही थी। दान उसी चीज का करना चाहिए योगेश्वर जो चीजे तुम सच में बाट सकते हो , तुम्हें तो पता पैसा कब बाटा जाता है और बाटने वाला वहा दाता और याचक दोनो होता है। और एक बात मेरे जीवन मे मेने पाया की मैं जब भी पैसे के मामले में मात खा कर किसी से उम्मीद लेके जाता उस घर में मुझे बस खाना मिले मुझे दूसरे दिन अपना मार्ग दिखता, बस उस समय से आज तक और आगे भी में ये सोचता हूं की को चीजे दान में दी जाए वो व्यक्ती की मूलभूत आवश्यकताओं में से हो तो वो व्यक्ती ऋण से मुक्त रहेगा, अन्न, और वस्त्र ऐसी चीजे है जो एक व्यक्ती ऋण से दूसरे व्यक्ति को देके निकल जा सकता है। रही बात निवारा यानी आश्रय की तो आश्रय भी कुछ समय सीमा से बंधा होता है। जब महाबली ने भी दान दिया तो वामन ने द्वारपाल बन के उसका ऋण चुकाया । दान का भी ऋण होता है योगेश्वर आशा करता हूं तुम समझ गए। कुछ कुछ ठाकुरजी। ठीक है अब दान की महिमा फिर आगे सुनने से पहले ये जानलो की धर्म के 4 पैरो में से एक है दान बाकी तीन है सत्य ,तप और दया, ये तीनो भाव से पूर्ण दान ही जल्द लेने वाले को ...

सरकार , प्रधान और नौकरशाही

जगन्नाथ की इस पावन धरा के वासियों को मेरा प्रणाम । मैं आज यहां मेरे छोटे भाई जैसे मित्र को अपना समर्थन देने आया हूं। वैसे मान लेते हैं की मैं और मेरे काम को सिर्फ आपका ग्रामवासी, आपका एक भावी लोकप्रतिनिधि योगेश्वर ही जानता है। और मैं उसके बारे मे जो कुछ सोचता हु अगले कुछ मिनटों में आपको पता चलेगा। एक बात तो सही है कि आपका योगेश्वर बहुत भोला इन्सान था और है , भविष्य में बदलाव की अपेक्षा कम है लेकिन आज तक का सत्य यही है। और ऐसा व्यक्ति अच्छा राजकारण कर सकता है ये मेरा मानना है। कुछ जानकारी प्राप्त हुई है कि इस गांव में 25 प्रतिशत लोगो की जमीन बैंक ने गिरवी रखकर ये गांव के लोग गाड़ी बंगला बनाए हैं। आसपास के गांव से ये गांव थोड़ा बड़ा है तो लोग हमेशा अपना बड़प्पन जताते है। आप बोलो अगर इसमें से कुछ घर पे नीलामी की बुरी नजर पड़ जाए तो एक सामान्य नागरिक होने के नाते आप कोनसा रास्ता अपनाओगे। 1 रास्ता है जो मैं मानता हूं कि ये जीवन की सच्चाई है और में व्यक्तिगत यही बोलता के जिसकी जमीन जायदाद गिरवी है उसके सम्मान को ऐसी ठेच पहुंचे की वो उभर ना पाए इसलिए मैं उसके जमीन जायदाद को कैसे कम से कम दाम ...

जमाता बनने का खेल (चंद्रशेखर)

गोवा में एक नेवी के आदमी के वजह से आज हम इस तटीय इलाकों से गुजर कर दक्षिण ध्रुव की तरफ जा पा रहे हैं ऐसा महासेन बोल रहा था।  ठीक है, वो आदमी इस जहाज पर हैं ऐसा भी उसने कहा था । और वो हमारे साथ कन्याकुमारी के तट तक साथ रहेगा ये भी बोला था। तो मेरे बारे में बहुत कुछ बताया है तुम्हे महासेन ने। तो आप है चंद्रशेखर,  हा हम ही है। क्या उत्तर प्रदेश से हो क्या।  हा जन्म तो उधर ही हुआ लेकिन फिर हम यहां गोवा में आगए और घर बसा लिया ,  वैसे तुम अपना परिचय दे सकते हो ? मैं गिलगमेश और ये योगेश्वर, हम up तो नही लेकिन लेकिन हिदुस्थानी भाषाक्षेत्र से आते है । तो फिर ठाकुर से कैसे मिले वो तो महाराष्ट्र का है गोदावरी यानी दक्षिण गंगा का राजपुत्र तुम नर्मदा और महानदी के नौजवानों को कब मिला । आप को कैसे पता चला कि हम mp और ओडिसा से है । कुछ जानकारी हम भी रखते अपने सहकर्मियों का , तुम्हे हमारे साथियों ने तुम्हारा प्रमुख काम तो बता दिया होगा । हा हम दोनो भी कैप्टन के साथ रहेंगे और कम्युनिकेशन और दिनचर्या पर ध्यान देंगे । ठीक है लेकिन मेरा मार्ग पर ध्यान सिर्फ मेरे कन्याकुमारी तक उसके आगे त...

सेनापती कडवुळ (मुरुगन)

ये दिल्ली का तोमर यहा क्या कर रहा है गीलगमेश ?? तोमर ज्वेलर्स लिखा है योगेश्वर!! दिल्ली छोडणे के बाद लढाई का जूनून ख़त्म होगया शायद। अब जेवर बेच रहे है खत्री ।  योगेश्वर जरा अपने शब्द सावधानी से उपयोग करो। पर हम यहां क्यों रुके है इस तटीय शहर में ?? पता नही क्या हुआ लेकिन ठाकुरजी ने कहा है अगर सभी वापस आए हो तो सबको अपने घर छोड़ के तू अपने घर जा के आ । मतलब ?? हम पहले गुजरात नही ओडिसा जा रहे है योगेश्वर !!! तो क्या मुझे पहले उतरना होगा ?? हा !! मुरुगन लग्न झाले तरी तू कसाकाय असा एकटाच फिरतो?? कस कळणार बघ तुला इथे माझा वडील आणि भाऊ आणि दोघेपण शेती बघत असतात आणि मी पैलवान होतो बघ कधी काळी अन वडील बोलला कर लग्न आईला मदत पाहिजे म्हून . बरं आता इथून पाहिले हे 2-3 पाहुणे वाट लावून घरी जावे म्हणतो . 2 असा की 3 पाहूणे, एक तर मुलगी दिसते रे तिला कुठ घेऊन गेलं होतास तू. अन् बाकी पाहुणे कुठले असतात इथले नाही अन् महाराष्ट्र भागातील पण नाही बघ ते . अन् ते तिथे तोमराकड काय करायलेत ते बघ जा जरा . जय भवानी तोमरजी , अरे महासेण जय भवानी,  आज महरठ्ठी माणूस रायारंच्याकड काय करायालाय बर . काय पाहि...