युद्ध का असर मंगलमय हो
गुरुवर्य मुझमें ऐसा क्या है जो कबीर जैसे बालक और योगेश्वर , महासेन जैसे युवकों में नहीं है। वो मंगल है वत्स , मंगल का काम है युद्ध और बुध का काम है व्यवहार । तो तुम में और महासेन में जो फरक है वो तुम समझ गए होंगे और राहु के बिना समुद्रलांघन नहीं हो सकता इसलिए कबीर जो अभी बालक है और योगेश्वर जो अभी एक राजा बन चुका है दोनो के लिए राहु केतु एक ही दिशा में है और वहां दो रस्ते होते है क्योंकि योगेश्वर तुम्हारा अनुयाई या तुम्हारा शिष्य था तो वो भोगविलास राजा बन गया है । कबीर आगे मैत्रेई और महासेन से मिलेगा क्योंकि दोनों की मातृभूमि या जुड़ाव इस दख्खन से है ।तो कबीर धर्मविलासी पंडित बनेगा । और जब तक तुम लौट आओगे योगेश्वर राजा है और महासेन के जाने के बाद और आने तक कबीर राजगुरु या अर्थशास्त्री बनेगा । तो यह भूमि में तुम जो कुछ भी करना चाहते थे उसकी नींव तुमने रख ली है। गुरुवर्य निसंदेह आप जो कह रहे है वो सभी सही हो लेकिन एक शंका से मुझे बाहर निकालने की सहायता करे कि यातकिंचित भी संधि के कारण अगर में न रहा तो क्या होगा । अपना कर्म किए बिना कोई भी तुम्हे न बुलाता है नहीं जाने देता है ग...