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ऑगस्ट, २०२४ पासूनच्या पोेस्ट दाखवत आहे

वृंदावन पधारो , वैष्णवाचार्य

 देखने में तो आप वैद्य जैसे लगते है पर आप कुशल कारागीर हो ये जान कर हैरानी हुई गिलगामेश जी , आचार्यजी उसे इंजीनियर कहते है हा हा वो अंग्रेजी में कहते है पर इस धरा पर तो आप कारागिर ही कहालाओगे। ठीक है समझ गया पर आप मुझे नाम से बुलाओ ये ठीक रहेगा । कोण आया है देखो वृंदावन में भगवताचार्यो ।।। ये कोण बालक बुलाया है । नेताजी लग रहा है नेताजी शादी हुई क्या आप की या अजीवन ब्रम्हचर्य का व्रत लिए हो । ये कोण है , आप दूसरे पाठकों से मिलिए वैष्णव कुमार , ये अपवाद है इन आचार्यों में। अरे और ये कोण साथ लेके आया है एक त्रिपुण्डधारी शैव को यहाँ इस शैव का उपस्थित होना निश्चित अच्छा नहीं होगा । और मेने सुना है की ये बालक आगे तारापीठ को जानेवाला है क्या इसे यहां जगह देना उचित रहेगा । आपको ये सब बाते किसने बताई गुरुवर्य , वैष्णव कुमार यह से चलो , किसी ठीक जगह आराम करो , क्षमा व्रजनिवासी आचार्य पर इन्हें इनकी जगह तक पहुंचने का वचन है मेरा । पर मुझे उचित लगेगा तब तक तुम्हे में रोक सकता हु , माध्वाचार्य,  आप अपना स्थान ग्रहण कर ले और इन्हे भी कहे मेरा सामना करे। क्या आप यह के द्वारपाल है गुरुवर्य। ...

मैं खरा शैव, भार्गव कभी वैष्णव ना ही ही सकते

तो तुम ज्योतिर्माठ जा पाओगे तो क्या करोगे । में अथर्ववेद में कुछ उपनिषद के साथ अध्ययन करके अपनी इस यात्रा का एक बड़ा हिस्सा वहा बिताना चाहता हु। और शंकरायचार्य जी से क्या कहोगे। पूछूंगा की शैवो के लिए आगे क्या करना है। क्या कभी विष्णुजी और भृगु ऋषि की काव्यमाता की कहानी सुनी है आपने, और तुलसी की कहानी इस सबसे विष्णुजी की महनता पर संदेह उत्पन्न होते है। आप का वैष्णव गुरु होने के नाते इस पर क्या विचार है। तुम शायद भृगु गोत्र से हो क्या नाम बताया तुमने अपना।  मेरा नाम इस ऐहिक जीवन मे शिवराज रखा गया है। और आपका इस एहिक जीवन में क्या परिचय है। मुझे लोग गिलगमेश नाम से जानते है । गिलगामेश ये अपने घर से मिला है या किसी गुरु ने दिया है। ऐसा भी होता है क्या ? मेरा तो घर से ही मिला हुआ नाम है पर वो कब और किसने रखा ये मुझे पता नहीं। में तो बस जन्म से ये नाम लेकर अपना प्रवास कर रहा हु। तो आप ने सच कहा में भार्गव हू। पर इसका विष्णु जी के भक्त को क्या लेना देना। जो उदाहरण तुमने दिए वह एक बात है पर तुमने परशुराम का नाम सुना तो होगाही वो खुद भार्गव और विष्णु अवतार माने गए हैं इस पर क्या कहोगे । आप ...

Multiple part no. affecting in supply chain & inventory management .

This is the topic which actually we can say is applicable every where including chemistry , English abbrivations & genral manufactring databases / product handling ERP softwares. We'll take one erxample of Amazon product from X seller . firstly end consumer / customer is really bothering about exact product , they search it through requirement search on google/serach engine . after that we are get intoduced to brand/product collabration effect e.g. xerox is actually photocopy machine but no one using today word photocopy & it is completly replaced by xerox in most of the world. same is written above like google's best product is serach engine but no one use search engine they use google . it applies with many products further e.g. colgate, parle g, etc. now get deep into our base aurguments  that what is the problem with multiple names for same product , what it varies that the name changes. any specification change generally main cause of this . e.g. There is differnce...

मैं खरा शैव, परशुराम, अश्वत्थामा, रावण को मेरा प्रणाम

कहा चल दिए साहब जी अकेले लग रहे हो । हा यहां से वृंदावन जाना है ।  मुझे लगता हैं कि आप कुछ खोजने जा रहे हो । वैसा ही समझो , मुझे जिसकी तलाश है वो मुझे भी पता नही पर सफर कर रहा हु। क्या सोचा था की हर जगह कुछ समय बिताके टूर कंप्लीट करना है बस , तुम्हे हर समय संघर्ष, करना होगा। तुम हो कोण बालक, और बड़े लोगों से किस प्रकार वे की जाती हैं वो तुम्हें माता ने बताया नही क्या । अघोरी, मयांग की साधिकाएं इनसे कोनसा रास्ता तुम्हे बचाएगा बोलो। नही पता या पता हो पर तुम्हे उससे क्या । में तुम्हारी अपनी नजर बदलने में मदत कर सकता हु , पर क्यों । क्यों की तुम अभी उस काबिल हो या नहीं ये खुद तुमको पता नही। क्या तुम सच कह रहे हो। में तुम्हारा दोस्त या फिर गाइड बन सकता हु। ठीक है। एक मिनिट तुम ने अभी जो मेरे साथ किया है उसे में पहले कभी पढ़ा हु। वो five states of grief hi hai aisa muze लगता हैं। मतलब क्या होता है उसका । मतलब तुम मुझे दुख को इंसान किस प्रकार से मान्य करता है उसके 5 नियम कहलो या तरीके है जैसे हम दुख में वर्तन करते है। पहले तुमने मुझे जी बताया मेने उसे पूरी तरह से दुर्लक्षित किया । दूसरी ब...

गृहस्थ आश्रम और योगी के ज्ञान का अंतर_1

महासेन कोण है यहां ???  वो रहा महाराज,  आजकल की बारिश के हिसाब से गांव में मिल गया है नही तो खेत में जाना पड़ता । महासेन हम रामानंद वैष्णव यहां आपसे ये अनुरोध करना चाहते हैं की आपका सहयोगी योगेश्वर गलत संगत में रह के आया है और अब हम चाहते हैं कि आप इसे जरा गृहस्थाश्रम की समझ देने की बात करने आए है। आप से मिलना हमारा परम भाग्य है महराज, योगेश्वर किस की बात हो रही है किस की संगत में फसे थे । मेरे हिसाब से में तो सही दिशा में था एक के बाद एक संघर्ष में विजय प्राप्त करने के बाद मुझे नहीं लगता की किसी गलत संगत में ये possible है , मुझे लगता है कि महाराज को कुछ विपरीत माहिती है गिलगामेश के बारे मे। महाराज गिलगामेश अनुशासित और परावृत व्यक्ती है। वो किस प्रकार से गलत है जरा समझाइए। ये प्रश्न में ही उत्तर है। महासेन ये पक्के तौर पर एक अकेला व्यक्ती जो जग के मोह से दूर हो कर पूरे जग को अपने से दूर करेगा तो उसे यह संसार के लिए वो उपयोगी नहीं रहेगा , संसार मे गृहस्थ आश्रम में न अनुशासन चले है न्हाई परावृति। ठीक है पर जो मुकाम योगेश्वर ने प्राप्त किया वो गिलगामेश की सारथ्य के साथ ही न। हा ...

""समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ है, समय लिखेगा उनके भी अपराध"""

तो वो दिन आज आही गया गिलगामेश, तुम्हें इस संसार का रामानंद बनाया गया है और तुम्हें इस बार वही बात फिर याद दिलाना चाहता हूं अपना अतीत हर समय तुम्हारा पीछा करता रहेगा तुम्हें चयन करना होगा सामने लढ़के जितना है या रणछोड़ बनके भागते रहना है। तो आप मुझे मेरे अतीत से मिला सकते हो।  जामाता तो तुम्हे बनना ही है पर समय तुम्हारा चयन मांगता है जैसे सती से विरक्त होकर शिव ने फिर पार्वती की तपस्या का फल उससे संसार करके दिया वैसे तुम्हारा वैराग्य तब तक रहेगा ,जब तक कोई तुम्हे अपने आप से फिर नयेसे शोधन कराएगा और वो विश्वामित्र को मिली हुई मेनका भी हो सकती है जो तुम्हे अपने लक्ष्य से दूर रहने में बांध सकती है। इतना सब बोल रहे हो माना की हम अपने आप को समर्पण और योग कुछ समय आगे सोच सकते हैं पर आप जो बोल रहे हैं उससे मैं पूरी तरह से सहमत नहीं हूं , क्योंकि पिछली बार का अनुमान कुछ हद तक सही था पर मुझे उसमे कमिया नजर आई। चलो सूर्यकुण्ड में खाड़ी के पास ये बोल सकते हो लेकिन समुद्र में मेरा हर लफ्ज़ कीमती होता है था और रहेगा ये ध्यान रहे। तुम्हारी बातों से ये तो मानता हु के कुछ नकारात्मकता आई ही है इस यो...

lean, circular economy and layers of natural resources utilisation

After this significantly useful topic supply chain with calendar effect  , in last week I Just had conversation with my senior & we got funny conclude on the buffer stock journey from government contracts to natural resources extraction etc. It was started with actual work of sourcing, purchase and procurement in upstream as well as sales and marketing, PPC and customer service at downstream . Lastly we were dropped at functional barrier are just one part of the process. Litterly people who works in upstream are always have urgency and they are the most unhappy mindset people as per us they are able to fulfill less than 50 % of times to the company.(May be we are 180° wrong but we have hypothesis with this assumption) and downstream people are always have urgency but they never really have the situation that they can deliver more than 50% but mostly having situation moving ahead from 50% at the end,  there delayed response may cause some loss but there fake & story typ...