सरकार , प्रधान और नौकरशाही
जगन्नाथ की इस पावन धरा के वासियों को मेरा प्रणाम ।
मैं आज यहां मेरे छोटे भाई जैसे मित्र को अपना समर्थन देने आया हूं।
वैसे मान लेते हैं की मैं और मेरे काम को सिर्फ आपका ग्रामवासी, आपका एक भावी लोकप्रतिनिधि योगेश्वर ही जानता है।
और मैं उसके बारे मे जो कुछ सोचता हु अगले कुछ मिनटों में आपको पता चलेगा।
एक बात तो सही है कि आपका योगेश्वर बहुत भोला इन्सान था और है , भविष्य में बदलाव की अपेक्षा कम है लेकिन आज तक का सत्य यही है।
और ऐसा व्यक्ति अच्छा राजकारण कर सकता है ये मेरा मानना है।
कुछ जानकारी प्राप्त हुई है कि इस गांव में 25 प्रतिशत लोगो की जमीन बैंक ने गिरवी रखकर ये गांव के लोग गाड़ी बंगला बनाए हैं।
आसपास के गांव से ये गांव थोड़ा बड़ा है तो लोग हमेशा अपना बड़प्पन जताते है।
आप बोलो अगर इसमें से कुछ घर पे नीलामी की बुरी नजर पड़ जाए तो एक सामान्य नागरिक होने के नाते आप कोनसा रास्ता अपनाओगे।
1 रास्ता है जो मैं मानता हूं कि ये जीवन की सच्चाई है और में व्यक्तिगत यही बोलता के जिसकी जमीन जायदाद गिरवी है उसके सम्मान को ऐसी ठेच पहुंचे की वो उभर ना पाए इसलिए मैं उसके जमीन जायदाद को कैसे कम से कम दाम में अपने नाम पे कर के उसे सड़क पर लाऊ ये मेरा रास्ता रहेगा मतलब मैं मेरा भला कैसे होगा और आगे वाला कैसे मेरे नीचे रहेगा इसके बारे में सतर्क रहूंगा इसे हमारी भाषा में win loose negotiation कहते है, के हम जिते और आगेवाला हारे ये तरीका ।
पर आपका योगेश्वर बोलता है की ऐसा करते हैं कि मान लेते हैं ये चीज सतयुग के काल में हो रही हो तो जो आपका योगेश्वर चाहता है वो हो सकता है और वो है या तो आप नीलामी में हिस्सा नहीं लेके उसे हर तरह से मदत करे की नीलामी से पहले ही वो व्यक्ती इस दुश्चक्र से बाहर निकले या फिर अगर नीलामी की नौबत भी आई तो आप वो जमीन खरीदेगे और उसके हक का पैसा देके वो खरीदेंगे ये है आपके योगेश्वर का उच्च विचार ये मेरी आत्मप्रचिति है योगेश्वर के बारे में।
तो आपके ग्राम ने ये व्यक्ति पाया है इसके लिए इस ग्राम को अभिनंदन पर एक अकेला जो कुछ कर पाता है उससे ज्यादा ही एक गांव करता हैं।
और ऐसे व्यक्ति का आसन आपको मजबूत करना है।
आशा करता हूं की मेरा विचार और संदेश आप तक पूर्ण रूप से पहुंचा हो और मैं आपको विनती कम सूचना करता हूं की अगर ये व्यक्ति आपके लोकप्रतिनिधी के रुप मे ap स्वीकारते हो तो अन्न, वस्त्र, निवारा ये मूलभूत अधिकार और दळणवळण तथा प्रसारमाध्यम इन सबकी पूर्ती होगी ।
कुछ कारण वश हमारे ठाकुर गुरुजी अभी यहां उपस्थित न हो सके नही तो आपको उनकी गुरुप्रचिति भी सुनने को मिलती योगेश्वर के बारे और आपने चाहा तो इतिहास में नाम बनाके ये व्यक्ती शास्त्रों में प्रचिति रखने की काबिलियत रखता है ।
में गिलगामेश ये बात आपके सामने रखता हु की अगर ये व्यक्ति आपका लोकप्रतिनिधि बनेगा तो बाकी 4 काम वो खुद संभालेगा और प्रसार माध्यम का जिम्मा में उठाऊंगा ये मेरा वचन है।
आज के जमाने की और एक बात जो शायद ये जग्गनाथ की भूमि के लोग समझ पाए,
जो अपना काम दान लेके आपके सुविधा के लिए करे वो ब्राम्हण होते है आप देखो डॉक्टर, वकील , सीए, शिक्षक,लोककलाकार और पत्रकार जो सरकार और आपके बीच की एक दुआ होते है जिनके खुद के संस्थान होते हैं जो वो कुछ हद तक अपनी मर्जी से चला सकते है।
जो खुद सरकार हो जो सरकारी नोकरो ने काम कब क्यों और कैसे करे ये तय कर सकता हो और यही ब्राम्हण भी जहा अपनी बात रख कर उम्मीद जताएं वो खत्री कहलाता हैं। आज की सुविधा ये है की आप उसे चुन सकते हो और उसे जनमत को लेकर हर एक विधि और विधान को सतर्क रहना पड़ेगा , इसीलिए शायद उनकी सभा को विधान सभा कहते है, जो विधि और विधान बनाते है और उनको हमे कर देना पड़ता है जो राज्य चलाने के लिए आवश्यक है।
जो वाणिज्य नाम से पूरा संसार संभालनेका उनका पालन पोषण करना और व्यवस्था मैं धन का आदान प्रदान वहन जो कर सकता हो और जो कुछ 10 लोगो से लेकर कुछ 1000 जिंदगियों को संवारने की क्षमता रखता हो वो बनिया या वैश्य कहलाता है ये लोग सरकार को सब से ज्यादा कर देते है और सरकार, प्रधान को व्यवस्था चलाने तथा बाजार में स्पर्धा रख के हर सुविधा को संसार के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा कर उदारनिर्वाह करते हैं।इनका घर नफेसे से चलता है।
और आखिरी बार मेरे आपके चहेते लोग जिनको हम शुद्र कहते है जो प्रतिशत में सबसे ज्यादा होते हैं। जो नोकरी करते हैं जिनका घर पगार पे चले। ज्यादातर ma बाप आजकल इसी रूप में अपने पुत्र या पुत्री को देखना चाहते है। जिनका सामन्य रूप से एकदम सुरक्षित जीवन माना जायेगा।
और लोग गांव में बनिया बने इससे अच्छा शहर में नोकर बनना पसंद करते हैं।
आखिर में यही कहूंगा , वो लेफ्ट राइट का तो पता नही पर खेती करने वाले किसान को यहां एक व्यापारी का दर्जा अगर आप चाहते हो तो योगेश्वर एकदम सही चुनाव होगा लोकप्रतिनिधि के लिए।
मानता हूं की गांव की लगभग 80% जनता किसान वर्ग की है, और आशा करता हूं की ये प्रतिशत कभी संतुलन न खो दे जो अन्न की कृत्रिम रूप की दरी बनाए।
जय जगन्नाथ, जय हिन्द।
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