Gilgamesh - ऐसा हुआ था

"इतिहास एक ऐसा विषय है जो इंसान को उसकी मूल जड़ों से जोड़ता है, हर देश का इतिहास उसकी संस्कृति के साथ-साथ उसकी प्राचीनता को भी दर्शाता है। इतिहास ही मानव को सशक्त और संपन्न बनाता है। जो इतिहास की घटनाओं को अपने शब्दों के माध्यम से संगठित करके समाज को उसके बारे में बताता है, वही इतिहासकार कहलाता है।
मैं Gilgamesh तुमसे ये पूछता हु की जब राम अयोध्या में थे तब यह भूमि में कोण था । सीता माता को किस जगह पृथ्वी में लीन होना पड़ा ।
वो जो नील नदी है वो कहा से और कब शुरू हुई । अगर इन सब का उत्तर तुम्हारे पास ना हो तो अपने आप को इतिहासकार बताना छोड़ दो।"
मेरे 40 साल के जीवन में मेने ऐसा प्रतिभावान व्यक्ति कही न देखा था 15 साल के किशोर बालक में ये सोच मुझे हजम न हुई मेने फिर भी उसके पिता से कहा की इसे इतिहास के विषय में रूची है इसे उसी विषय में ज्ञान अर्जित करने का अवसर दे । पिता ने हा में हा तो मिलाई मगर ये अर्थार्जन का जरिया नहीं होगा ये जोर देके उन्होंने बताया ।
अगर आप जैसा ये भी सिर्फ इतिहास को पकड़कर बैठ गया तो हमारा दो वक्त के रोटी का क्या होगा।
दुखी मन से में वहा से निकलने वाला था की गिलगमेश मुझे बोला चलिए मास्टरजी स्टेशन तक छोड़ आते हैं आपको ।
तब मुझे कुछ और नजर आया की वो अच्छा चालक भी बन सकता है । तो मैंने उसे रास्ते भर में पूछा कोण कोण सी वाहन चला लेते हो तो वो कहने लगा मास्टरजी अभी तो 2 व्हील ही चली है । आप का आशीर्वाद रहा तो जायेंगे ट्रक तक ।
मैंने भी हा में हा मिलाई पर एक और रास्ता भी मुझे दिखा जो मेरा और गिलगमेश का दोनो का भला कर सके । पर उसके लिए मुझे भी मेरा खुद का पैसा खर्च करना होगा ये मुझे मालूम था ।

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