योग और ध्यान
ठाकुरजी कुछ तो जादू है आपकी बातोमें , वाणी को सिद्ध करनेवाले बाबा बन गए हो शायद आप। ये संवाद हमारे बीच कॉलेज के कॉन्फ्रेंस हॉल में हो रहा था जहा विशेष लेक्चर के सेटअप के लिए में था और गिलगामेश मेंri मदत कर रहा था।
"क्या हुआ" मेने बात की गहराई जानने के नजरिए से पूछा ।
कुछ चीजे अब मेरे हाथ में है ऐसा लग रहा है पहले के तुलना में।
कैसे ? मेने फिर विवरण प्रस्तुत करने की मंशा से पूछा।
ध्यान से और योग से मुझे ये पता लगा कि जो किताबे मुझे बस इस दुनिया को भूगोल और इतिहास के टूर और ट्रैवेल को बताती हैं उससे बड़े बड़े ट्रेवल तो हमारे पूर्वजों ने पहले एक जगह बैठ के किए है।
ठीक है तो तुमने कोनसा ट्रेवल किया ? मेने फिरकी लेते हुए पूछा ।
तो गिलगामेश चालू हो गया "आप अभी सच्चे गुरु लग रहे हो ठाकुरजी वो गुरुकुल वाले , में चाहूंगा के ये योग और ध्यान का मार्ग सब को मिले । तो गुरुजी मैने सबसे पहला सफर करना चाहा पूरे ब्रह्मांड का साशरीर पर उसके बाद मुझे स्मार्ट goals ki याद आई और तब मुझे लगा ये achievable नही है। उसके बाद में लग गया पूरे विश्व में मेरे पूर्वज खोजने तब मुझे ये पता लगा की अब ये पता सिर्फ अंदर नहीं मिला बाहर भी खोजना पड़ा । पहले मैने ये जाना मेरे पिता कहा रहते है और वो वही क्यों रहते हैं तो ये अधिवास का नियम है उसके बाद वहा पर मेरे सरनेम के जो लोग है वो कब से है तो मुझे कुल या जाति का अनुमान और उसकी गहराई का पता चला उसके बाद में ध्यान लगाया की उसको कुलदेवी कहा है वहा तो लोग हमेशा जाने का प्रयास तो करते ही है तो वो वहा क्यों जाते है और उसके अलावा गोत्र भी लोग मंदिरो में पूछते है ये मैने बाहर से जाना।
अब अंदर मैंने खोजा तो मुझे पता चला की गोत्र का एक ऋषि जो हमे आकाश में तारे के स्वरूप में मिलेगा और वोह हो रास्ता दिखाता है जिंदगी जीने का । ध्यान से मुझे ये भी पता चला मूर्ति पूजा का संबंध है हो इसलिए की हम प्राणप्रतिष्ठा किए हुए मंदिरो में वो ढूंढे जो हमे रास्ता दिखाता है । मै अपने कुल गोत्र, और कुलदेवता से जुड़ गया हू ध्यान और योग से। "
"तुम बड़ा अच्छा बोल लेते हो गिलगामेश , ये तुम्हे आगे काम में आयेगा । अब रही बात specific तुम्हारे पहले वाक्य का योग तब तक ना आयेगा जिंदगी में जब तक कोई क्यूरियोसिटी न हो और चिंतन करनेवाला हो वो योग का उपयोग अंदरूनी शांति या अपने मार्ग को एक दिशा में प्रशस्त करे इसलिए योग का कुछ जिम्मेदार और जरूरतमंद लोगों को ये प्रदान हो ये मेरा वयक्तिक मत है तुम्हारा मत अलग हो सकता और में खुश हूं के तुम ने इतने कम समय में वो पाया जो मुझे मिलने को साल से ज्यादा समय लगा वैसे भी तुम्हारी पीढ़ी भविष्य की पहली पीढ़ी है ये में मानता हु अगर मैं अपने आप को इतिहास की आखरी पीढ़ी मानता ही क्योंकि मैंने वर्ष 2007 में हात में डेस्कटॉप कंप्यूटर का कीबोर्ड लिया और आज 20 साल होने का समय है में सिर्फ ऑफिस प्रोडक्ट्स यूज करना जानता हु अगर तुम्हारी पीढ़ी में देखे तो बहुत से लोगों को नेटवर्किंग, वेबसाइट का ज्ञान है जो मुझे अब हासिल करना मुश्किल होगा।"
मैंने उसे अपने मदत के लिए धन्यवाद देते हुए उसे उसके विवरण का सार और उसकी मंशा को लेके मेरी राय देदी।
जैसा आप सही समझे ठाकुरजी। मेरा अब किताबो पर कुछ लगाव बढ़ेगा क्युकी आपने जो कहा वो सत्य है क्यूरियोसिटी बढ़ गई है और मुझे बाहर से ये भी पता लगा की 52 शक्ति पीठ है वो भारतीय प्रायद्वीप के अंदर है उसमे से एक मेरी कुलदेवता भी है।
तो ये इतिहास और भूगोल का संयोग है जिसे हासिल करने के लिए ये मेरा मार्ग आपने मुझे दिया है , धन्यवाद।
कुछ दिन पहले ये चित्र कुछ ऐसा था
"ये जोश में यहां तक तो आगया ठाकुरजी लेकिन ये टूरिजम और ट्रेवल की बाते पल्ले ना पड़ रही बोलो क्या करू ।""देखो गिलगामेश तुम्हे इतिहास से लगाव है तो तुम्हे भूगोल के चक्कर तो लगाने पड़ेंगे क्योंकि एक जगह बैठके तो तुम पूरा इतिहास न जानोगे ना कोई तुम्हे जानेगा ।"
"कुछ उपाय निकालो ठाकुरजी हम अपने पिता से क्या कहके निकले थे और अब क्या होगा पता नहीं।"
ये बाते हम जब पहली बार एकांत में उसके हॉस्टल के बाहर मिले तब की थी ।
मेरे कहने पे उसके पिता ने उसे MBA के कोर्स में जहा में सांख्यिकी पढ़ा रहा था वहा एडमिशन कर दिया था ।
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