योगेश्वर सोमवंशी
ठाकूर जी , आप से मिलके लगा जैसे वो लखण को मुसा मिल गया हो | क्या होगया योगेश्वर आज इतणे सभ्य और सौम्य शब्द और वो भी तुमसे , तुम तो वादग्रस्त और क्रांतिकारी शब्द के लीये जाणे जाते हो . मेणे उसकी चिकणी बातो को कुछ जाणणे की भूक को समझते हुये उससे पूछा |
हा आप से मिलने से पहले मुझे लगता था की जितना ही सब कुछ हे लेकिन आप से मिलकर लगा की जाणणा और फिर भी उदासीन स्वभाव से उसे स्वीकार करना ये सबसे महत्वपूर्ण हे | उदासीनता और वैराग्य मे फरक होता हे योगेश्वर , मे कर्म करता हू और मुझे यहा सब का लेखा जोखा रखके उसे लोगो को एक पथ पर ले जाणे के लीये सामग्री बनाने का दायित्व हे . वही मे भी कह रहा था ठाकूर जी अगर सब कूच जाणणे के बाद मे आप के जगह होता तो मे आदेश देकर सबसे ये आशा करता की वो उसका पालन करे | पर आप सब तथ्य सामने रखके के बस उपदेश करते हो स्वीकार करना हर व्यक्ति पर छोड देते हो मेने बचपण से देख रखा हे Diplomacy always win over talent | वो क्यो भला बचपण की यादो मे खोए हुये को ये जगत मे जिना मुश्किल हो जाता हे. आप सही हो सकते हो ठाकूरजी पर मे बहुत बार हार चुका हू भाग चुका हू मेरे बहुत दोस्त थे और मे सोचता था के गाव मे अपना ही राज हे पर बाद मे पता चला के अपने हमेशा मा बाप ही होते हे बाकी कितना भी पास वाला दोस्त हो उसका इंटेरस्ट समाप्त तो दोस्ती समाप्त | लीडर और मॅनेजर मे फरक होता हे योगेश्वर तुम गलत जगह सिख रहे हो ऐसा लग रहा हे अगर राज ही करना था तो राज्यशास्त्र पढ लेते वहा तुम सूट हो जाते थे .
पर हालात ने आपसे मिलाने का सोचा ठाकूरजी , भलेही मे एमबीए कर रहा हू लेकिन मेरा अतीत पब्लिक relation और समाजसेवा था | तो आगे क्या हुआ ये भी बताओ आज तुम भडास निकाललो . मेरा एक दोस्त था सर जिसके वजह से मै यहा हु ये सही है या गलत पता नहीं लेकिन वो एक सरपंच का बेटा था और मे एक गरीब घर से गाव के सभी त्योहारों मे पैसा सरपंच का और नियोजन मेरा रहता था क्योंकि सुदयम नाम का वो मेरा दोस्त और मे एक साथ एक स्कूल मे पढ़ते थे और एक समय ऐसा आया की मै या वो ऐसा गाव मे स्वांग हो गया की पाटील साब के बाद कोण ?? सूदयम या योगेश्वर , लोकनेता योगेश्वर ही हो सकता है लेकिन आखिर मे मेरे पापा ने पाटील साब से समजोता कर के मुझे गाव से शहर मे एक फैक्ट्री मे जॉब करने भेजा वहा मुझे पता चला की कैसे सब अपने साथ हो के भी वक्त रहते पलट सकते है , वहा भी मेरे शब्दों से प्रभावित होते थे और मुझे जाते समय एक अच्छा पद मिल था लेकिन यूनियन लीडर और स्टाफ के लड़ाई मे मेरी बली गई ओनर बोल की दूसरी फैक्ट्री या आगे सीखना है बताओ लेकिन यह से निकलो । मेने आगे सीखना चुना और आज आपके सामने खड़ा हु |
योगेश्वर तुम बोहोत भोले लग रहे हो ये सुनकर तुमने सही कहा डिप्लोमसी की जरूरत है तुम्हें पर पहले योग्यता होनी चाहिए और आगे के इंद्रजाल या चक्रव्यूह का आकलन भी होना चाहिए .मैंने इतना बुरा योग तो नहीं पाया लेकिन मे भी कभी ऐसे हालत मे पोहोच गया था जहा मुझे ये जगत सच मे मिथ्या लग रहा था और अपने मा बाप से भी मे नहीं मिल पाया था उनकी आखिरी दिनों मे , फिर भी आज अपनी पत्नी के साथ समय व्यतीत करते हुये और दूर बसे अपने लड़का लड़की के परिवार देखके आज समाधान होता है और कुछ बाकी बच पाया है तो वो मेरा स्वभाव माना की मेरी भी सुरुआत तुम जैसी ही थी पर मुझे लगता है की तुम और तुम्हारी पीढ़ी बोहोत बडी सफलता प्राप्त कर पाओगे तुम्हारी पिछली 4/5 पीढ़ियों का चक्रवाढ गणित मिलके तुम खुदकों बोहोत पैसेवाले बताओगे पर तुम मुझे ये बताओ योगेश्वर कभी फिर गाव जा पाओगे और जो तुम्हारे दोस्त लोग ही जो तुम्हारे कहनेपर पूरा आयोजन रचते थे उनकी दुविधा मिटा पाओगे या नहीं ।
इसका उत्तर अभी तो मेरे पास नहीं है ठाकूरजी पर आप बोलो मे क्या कर सकता हु , मे क्या करू जो मेरे गाव की वित्त मे वृद्धि करे।
अभी घर से निकलने के बाद तुम गाव का विचार कर रहे हो तो तुम कलयुग के प्राणी नहीं दिख रहे योगेश्वर , इस नींद से जागो की तुम्हें फिर गाव मे कोई सस्थान प्राप्त हो सकता है . अभी तुम इस वनवास मे अपने अधिकार क्षेत्र को बढ़ाओ और यह तुम्हारी कर्म भूमी की प्रति दायित्व को निभाओ .
ठीक है ठाकुरजी , कोई दोस्त यहा नहीं बन पाया है इसलिए जरा ढूंढ रहा था कोई जो मन हल्का करनेको ।
फिर ऐसी गलती मत करना योगेश्वर जंगल मे सीधे पेड़ पहले कैट जाते है . तुम्हें दोस्त मिलेंगे पर मुझे जो तुमने बताया ये कोई सुनके उसका गलत तरीके से उपयोग कर सकता . थोड़ी गोपनीयता रखो और चीजों मे शामिल न होके उसे प्रभावित करने के क्षमता प्राप्त करो नियोजन के जगत मे ये महत्वपूर्ण है . और एक इतिहास का विदयर्थी है जो तुम्हारा मित्र बन सकता है . समय रहते मे तुम्हें उससे मिल दूंगा . तब तक के लिए अपने शिक्षा की और ध्यान लगाओं .
ठीक है ठाकुरजी मुजे प्रतीक्षा रहेगी आपकी ओर से बुलाने की , निकलता हु , धन्यवाद ।
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