तुष्टिकरण और भेदभाव
तो तुम मिल लिए एक दूसरे को. मैने दोनो को फिर उकसाते हुए कहा , योगेश्वर ये वही तुम्हारा नया दोस्त जो तुम्हे यहां नियोजन और तुम्हारे जन्म वंश की बाते तुम उसको बोल सकते हो पर ध्यान रहे इसका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है.
हा ठाकुर जी मिला मैं गिलगमेश से अभी वो ऑडिटोरियम में जरा जल्दी आया तब वो टूर और ट्रेवल का शौकीन लगता है और उसने मुझे मिलते ही वही पूछा जो आप बोल रहे थे, उत्तर भारत में कोण नही जानता जाति , धर्म , वंश, इनका ज्ञान पहले लिया जाता है यही सच है।
और उस चीज का अनुमान नाम से भी होता है और अच्छा है यहा वर्णवाद नही है वरना योगेश्वर वहा भी अटक जाता, फिर क्या कहे भगवान जगन्नाथ के राज्य प्रदेश है वहा एक जगह सोमवंशी क्षत्रिय कहने वाले घर मैं जन्म लेकर यह शिवाजी महाराज की भूमि में नया मोड़ लेकर कैसा लग रहा है योगेश्वर ।
ये ऐसी बाते तुम ही बोल सकते हो गिलगामेश.वैसे भी योगेश्वर इंट्रोवर्ट है ऐसा मेरा मानना था तुम बताओ तुम्हे क्या लगा .
हर एक को अपने दुःख बताके रोने वाला थोड़ी ना इंट्रोवर्ट होगा ठाकुरजी। लोग हमेशा सहानुभूति नहीं देते योगेश्वर बहुत जगह दहशत काम आती है । आगे से ध्यान रहे नया दोस्त बनाओ तो उससे जानो ना की अपनी ट्रेन चालू करो , मैं सुन लिया पर पता नही आगेवाला हमेशा सही होगा या नहीं ।
ठीक है गिलगामेश लड़का नया यहाँ आया है मैं तुम्हे मिलके इसे साथ रखने के लिए बोलने वाला था. अभी बोलता हु आगे से तुम्हारे साथ इसकी व्यवस्था करो .
ठीक है ठाकुर जी पर में अभी ऑडिटोरियम और इवेंट्स में थोड़ा बीजी होगया था, मैं हॉस्टल में तो व्यवस्था करवाता ही लेकिन इसे ऑपरेशन वाले लोग खुद से ढूंढ के उनके साथ कॉलेज कैंपस में रहना होगा ।
तुम्हे चलेगा योगेश्वर ? मैने पूछा .
ठीक है सरजी। मैं समझ गया जी गिलगमेश ने कहा।
पर पहले दो सेम तो सभी specialization एक साथ पढ़ते है ना।
गुड क्वेश्चन, गिलगामेश, कुछ कहोगे.
ये जो भीड़ है वो लंगूर या भेड़ों की भीड़ नही है योगेश्वर , ये भेड़ियों की भीड़ है और organisation का मतलब भेड़ियों का कबीला जहा लीडर , मैनेजर एक साथ रहते हैं, और तुम यहां क्या सीखने आए हो वो तुम्हे तय कर के उस कबिले का भाग बनना है । और एक बात नेटवर्क का नाम सुने हो , वो यही से तुम्हे लेके जाना है ।
पर मेरे से बड़े , और छोटे उम्र के लोगो से में कैसे कनेक्ट कर सकता हु।
यहां अब तुम्हे भेदभाव और तुष्टिकरण का अनुभव लेना पड़ेगा योगेश्वर, अगर तुम इस विषय में पहली बार किसी से मिलोगे तो तुम पाओगे कि इस व्यक्ति की किसी और व्यक्ति से ज्यादा बनती है और वो उसे हर वो ज्ञान शेयर करता है नकी तुमको पर अगर तुम उससे लगाव बढ़ाओगे तो शायद वैसे लोग तुम्हारे पास भी आए जो तुम्हारे कुतुहल की तुष्टि कर दे , मैं अपने नजरिए से बोल रहा हु , अगर पहली बार पानी में उतरे हो तो पहले जानकर की सलाह जरुरी होती है वैसेही नए लोग उनसे मिल के तुम्हे अपना काम निकालना और ज्ञान अर्जित करना ये दोनो ही ध्येय हो , तभी तुम यहां से कुछ प्राप्त कर के लेके जाओगे।
बाकी रही बात भेदभाव की जन्म से जो व्यापारी होते है उनका अगर कोई काम तुम हाथ में लोगे तो तुम , outsider ही कहलाओगे, मुझे पता है की मुझे इतिहास और संस्कृति का क्या ज्ञान है और में अपने जीवन मे क्या चाहता हूं, और उसमे मुझे कोनसा समूह उत्पीड़न कर सकता है, पर अब अनुभव के बाद में ध्यान लगाके जो जहा से चाहिए वहा से निकलने का सामर्थ्य रखता हु , में चाहूंगा कि ये चीज तुम भी सिख लो।
आज के लिए इतना बस ऐसा लगता है गिलगामेश , ये तुम्हे कल हॉस्टल में मिलेगा , रूम और बाकी फॉर्मेलिटी कर लेना, योगेश्वर अभी जो चीजे उस के लिए चाहिए वो लिस्ट बनाके देदो.
ठीक है ठाकुरजी , दोनो ने एक साथ बोला और वो मेरे सामने से निकल गए.
अभी ये चीजे सामान्य ही लग रही है, पता नही भविष्य में ये कितनी जटिल हो जाएगी ऐसा सोच कर , मैं भी अपने काम को लगा,
टिप्पण्या
टिप्पणी पोस्ट करा