journey to Antarctica
मेरा और तुम सबका साथ यही तक हैं गिलगामेश, मुझे पता नही के ये सोमनाथ तुम से कुछ कह रहा है या नहीं पर तुम जिंदगी के सबसे बड़े अनुभव से कुछ समय कि दुरी पर हो , और ध्यान रहे असली योगी का काम ध्यान उपयोग सबको उपदेश देने का होता है आदेश तुम नही दे सकते तुम ये जो आगे कहानी बनेगी उसके कारक हो कर्ता नही ये ध्यान रखना .
हा ठाकुरजी ध्यान रखूंगा के यहा एक पुत्री के अपने पिता से मिलने के लिए ये आयोजन है और हम उस आयोजन में निम्मित मात्र है ।
यहा से दक्षिण ध्रुव यानी अंटार्कटिका तक कोई बाधा नहीं है गिलगामेश , जमीनी या भौतिक बाधाए नही पर जैसे धृतराष्ट्र को योगेश्वर भगवान ने अपने योग से उसके साथ हुए न्याय का अनुमान लगाया था वैसे तुम्हे समय आगे बढ़ कर सोचते रहना होगा , 3 युग में 3 योगियों ने समाज के हित का काम किया है ये आगे जो काम पड़ा है वो उतना बड़ा तो नही पर तुम्हे उनका स्मरण रहना चाहिए .
आप शिव, हनुमान , और कृष्ण की बात कर रहे न ठाकुरजी , वो तो मुझे बचपन से याद है कि हर बाध्य समय में योगी अपने पूर्ण विश्वास से और क्षमता से कुछ ऐसा प्राप्त कर लेता है।
ठीक समझे , तुम्हारा मित्र योगेश्वर कहा है .
वो मैत्रेयी और महासेन के साथ होगा ।
ठीक है चलो देखते है.
राम कृष्ण हारी गुरुजी ,
राम कृष्ण हारी, काय महासेन आनंदी दिसतोय , कुठाय तुझी मैत्रीण सॉरी मैत्रेयी नाव आहे ना तिच,
गुरुजी ती रिकॉर्ड्स आनी टाइम टेबल चेक करतिए, आनी मी सर्व रसद म्हणजे खाने पीने याकड़े लक्ष देनार आहे .
तो योगेश्वर कूठे आहे ?
तो कैप्टन च्या केबिन मधे असेल.
ठीक है!
अरे योगेश्वर यहां क्या कर रहे हो बाकी लोग छोड़ के , तुम्हे ढूंढ के शुभकामनाएं देके निकलना था मुझे .
ठाकुरजी ये समुद्र मैने पहली बार देखा और इसका दूसरा छोर भी में देखूंगा अब बस निकलने के देरी हे, आपका और समय का धन्यवाद यह समय दिखाने के लिए ।
तुम क्या कर रहे हो यहां आके, बाकी लोगो का तो पता चला .
क्या पता चला ठाकुरजी, मैं और गिलगामेश यहा से रस्ता नापेंगे और कप्तान को कुछ सहयता और पूरी शिप तक माहिती को पोहोचने का काम मेरा है ,
गिलगमेश को वैसे तो elctronic के बारे में बहुत ज्ञान है ठाकुरजी ।
हा जब पहली बार मिला था तो बोल रहा था 2009 की एक फिल्म देख के कोई इंजिनियरिंग की थी , इसीलिए तो ऑडिटोरियम और इवेंट्स संभालता था कॉलेज में ,
में उसको मनाके लाया था की कोई इतिहास जानने के लिए बाहर निकल , आज इतिहास बनाने को लिए निकल रहा ही वो .
चलो ठीक है , जहा तक कनेक्शन है बताते रहना मुझे भी , बाकियों का तो पता नही , लेकिन जगन्नाथ की भूमि को तुम्हारी प्रतीक्षा रहेगी योगेश्वर ,
क्या ठाकुरजी आपने ही तो कहा था की जो बीत गया वहा फिर नही जाना है फिर क्यों ?
तुम एक सहयोगी के नाते जा रहे हो तुम्हारी अपनी भूमिका तो तुम्हे निभानी होगी समझे.
समझा तो नही पर मुझे वापस आना भी है ये आप दर्शा रहे हो।
ठीक समझे, मैं तुम्हे यही सोमनाथ मिलने आऊंगा , और तुम्हे फिर जगन्नाथ तक ले जाऊंगा.
ठीक है ठाकुरजी ।
कशी आहेस मैत्रेयी ?
छान सर, मला वाटले नवते मि हे करू शकेन पण महासेन आनी बाकी कॉलेज क्लासमेट आहेत तर थोड़ा आत्मविश्वास वाढला.
ठीक , प्रवास हा तो पर्यंत छोटा वाटतो जो पर्यंत सोबती विश्वासपात्र आनी मुक्काम किंवा डेस्टिनेशन दखलपात्र अस्ते आज तरी तू जे कारण सांगीतले ते दखलपात्र आहे असे समजतो आनी, तिथे गेल्यावर सगळी व्यवस्था केली आहे ना तुझ्या वडिलांनी 4 माणसांची.
हा सर मी बोलले आहे,आणि पुढेही बोलते त्याबद्दल.
महासेन , विश्वनाथ आनी अन्नपूर्णा यांना काय सांगून आलास?
हेच की मैत्रेयि आनी तिच्या बाबाना भेटुन येतो ,
ठीक आहे भेट परत अल्यावर.
ठीक आहे गुरुजी।
हा गिलगामेश सब ठीक ठाक तुम भी क्या कैप्टन साथ रहोगे ? योगेश्वर तो अभी से कैप्टन के साथ है.
ओह मुझे लगा वो बाहर को दुनिया को इंसानी दिमाग के साथ देखेगा , ये दो लोग हमेशा ही दो रहेंगे तो सफर सुना सुना लगेगा में देखता हु योगेश्वर और मेरा समय यहां इनके साथ भी हो।
चलो ठीक है यही मिलेंगे किसी और समय अगर तुम चाहो तो , योगेश्वर को लेके आना साथ जब भी आगे मिलोगे.
ठीक ठाकुरजी, बाबा को बोल देना हड़बड़ी न करे पूरा प्रवास तो fix है लेकिन मेरा मार्ग में थोड़ा बदल सकता हु ।
ठीक है मिलते रहेंगे वो और हम, उत्तम सारथी बनो !!!
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