अनाहत से उपर उठो गिलगामेश
ठाकूरजी वो मुझे बहुत सालों बाद मिली थी । हम जब विजाग से पूरी की ओर जा रहें थे तो वो मुझे as a टूर गाइड मिली और महासेन और मैत्रेयी भी उससे घुल मिल गए थे पर फिर किशोरी ने अपने अभी के सभी परिस्थिति से मुझे अवगत कराया तो मुझे लगा कि समय निकल गया है और हम अब संसार को आगे नहीं बढ़ा सकेंगे क्योंकि डिग्री के बाद उसके पापा और वो मेरा शहर छोड़ के चले गए थे पर वो विजाग गए ये बहुत वर्षों बाद पता चला। और उसका एक boyfriend है जो क्रिस्चियन है और वो शादी करने वाले हैं।
धन्यवाद इस संपूर्ण और इथमभूत वृतांत के लिए गिलगामेश , लगता है की वो तुम्हे फिर से याद दिलाना पड़ेगा जो तुम्हारे पास है उसपे ध्यान दो अपने अतीत का सामना करना होगा और उससे आगे निकलना होगा ।
अगर तुम्हे सच में किशोरी के लिए अभी कुछ लगाव हो रहा है तो वो लगाव जब वो एमपी छोड़ के जा रही थी तब कहा था ??
तब से अब तक जब वो तुम्हारे सामने नहीं आई तब तक कभी तुम्हे उसकी याद आई है।
मनुष्य का ये स्वभाव है की कोई चीज वर्तमान में सामने हो तो वो भूत और भविष्य दोनो के बारे मे मकड़जाल बनाता है और वो चीज ही उसकी बाधा बनती हैं गिलगामेश , तुम्हे यहां लाने का जो कुछ श्रेय में ले सकता हूं वो तभी ले सकता हूं जब तुम गिलगामेश तुम्हारे नाम के भूमि को फिर जाके देख आओ वहा अभी क्या हो रहा है। तुम अपने कुलदेवी की बात कर रहे थे वो तो देख आओ , पूरी धरातल का इतिहास संकलन तुम करने वाले थे गिलगामेश कहा ये घर परिवार संसार में अपनी भूमिका निभाने से पहले पद रहे हो तुम्हारी उम्र और 10 साल तक साथ देगी इसके बाद तुम ये चीज करने वाले ही हो।
और इतने असीम संभावनाएं भी काम नहीं करेगी अगर तुम ये अपने सामर्थ्य को इस तरह गवा दोगे ।
अपने अनाहत चक्र में तुम अटक गए हो गिलगामेश , अपने इंद्रियों को आज्ञा देने के लिए वहा से आज्ञा चक्र को योग से प्राप्त करो तो हम कुछ और विशेष ज्ञान की बाते कर सकते है।
अब ये तुम्हारी अपनी मर्जी है की तुम्हे कुछ विशेष करना है जिसके तुम स्वयं हकदार हो या सामन्य करना है जो लोग करते आए है।
वैसेभी विश्वामित्र को भी इंद्र ने ऐसेही मेनका को भेजा था और आगे शकुंतला दुष्यंत और भरत ये कहानी बनी पर इसके आगे विश्वामित्र ने कुछ नहीं किया फिर उनको राम के आने तक चुप रहना पड़ा ।
वैसेही तुम अपने स्वेच्छा से निर्णय लो क्या करने वाले हों और मुझे बताओ ताकि तुम्हे उसकी अनुमति और उसका मार्गक्रमण के लिए आवश्यक सामग्री देने का प्रयास में कर सकता हु , आशा करता हूं के तुमने किसी को ये ऑडिटोरियम का नॉलेज़ दिया होगा और वो अकेला वो संभाल पाएगा ,
नहीं ठाकुरजी वैसे तो कोई नही है मेरे साथ अभी योगेश्वर के बिना और उसका काम ही अलग है में आपको अपने और ऑडिटोरियम दोनो के भविष्य का अनुमान कुछ दिन में बोल देता हूं।
आप भी चाहे तो कोई योग्य और गरजू छात्र देखे जो हमे इस विषय में सहायता कर सके ।
ठीक है, पर फिर एक बार समजलो अनाहत से ऊपर उठोगे तभी तुम त्रिकाल दर्शी हो पाओगे।
आप अपने आप को त्रिकालदर्शी मानते है ठाकुरजी जी।
हर एक का कोशल्य अलग होता है गिलगामेश मेरी वाणी मेरा अधिकार है ,
और में समझता हू की तुम्हारे नेत्र ज्योति के आगे त्रिकाल होने ही चाहिए और योगेश्वर के भुजाओं तथा पैरो में वो ताकत हो जो तुम्हारे योजना को अमल में ला सके ।
तो मुझे योगेश्वर के साथ रहना होगा ???
अब वो भी पूरी तरह से तैयार होना चाहिए अपने अतीत से लड़ने को। इसके सारथी तथा सल्लागार के रूप में तुम्हे कुछ समय व्यत्यित कर के संसार के अंदर के व्यवहार का ज्ञान प्राप्त कर लो गिलगामेश ये तुम्हे तुर्वसू के तुर्की से लेके वरका तक नदियों को नवजीवन देने के लिए आवश्यक होगा ।
वो जगह अब रहने लायक है ठाकुरजी ??
वो तुम जानो और तुम्हारी किस्मत गिलगामेश।
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