खरा वैष्णव तेरा शिष्य, जा वरका मार्गे हिंगलाज, तुर्की

"काली, तारा महाविद्या, षोडशी भुवनेश्वरी।
भैरवी, छिन्नमस्तिका च विद्या धूमावती तथा।।
बगला सिद्धविद्या च मातंगी कमलात्मिका।
एता दश-महाविद्याः सिद्ध-विद्याः प्रकीर्तिताः"

'यहा Gilgamesh कोण हे ??"
मे हू महाराज, 
कब से जगन्नाथ की भूमी मे हो, एक विधायक कार्य के लिये 5 वर्ष बिते है महाराज, माता बगला का आदेश अपने कुल के दीपक के लिये , की ये भूमी छोडनी होगी.

क्यो महाराज??
भूल गये ठाकूर के उपदेश तुझे तूर्वसू की नगरी से अपनी नगरी तक जाना हैं.
लेकीन मेरा यहा मन लग गया है महराज!
मैं तो ठाकूर ने तो बोला था वत्स योगी हैं ,योगी को कब से मोह होने लगा Gilgamesh.
इतनी भी क्या जलदी है महाराज एक हफ्ते से ज्यादा नाही लगेगा मुझे वहा जाणे के लिये !
तो योगी को भ्रम है की सब कुछ उसकी थाली में खुद आयेगा। गिलगामेश तुम्हारी मां बाप से कब मिले हो आखिरी बार , 
5,6 साल होने को है महाराज पर उसका यह क्या ।
बुलाओ तुम्हारे यजमान को जिसका तुम सारथ्य करने को यहां रुके थे , 
वो मेरा यजमान है !! ठीक है योगेश्वर जी महाराज जी को आपसे अनुरोध करना है कृपया अपने आप को यहां स्थानापन्न करिए ।
जी महाराज जी बोलिए ये सेवक आपकी क्या सेवा कर सकता है।
अपने सारथी को तुम्हे मुक्त करना होगा इसके खुद के कार्यसिद्धि के लिए, आशा है की आप अब अपना राज्य चलाने में सक्षम और दक्ष है ।
ठीक है महराज पर ये आवश्यक है??
अति आवश्यक है वत्स, और हम तुम्हे तुम्हारे मित्र को बुलाने का अनुरोध करते है जो योगमाया योगेश्वरी का कुलदीपक है। 
वो कोण है महाराज ??
जिसका विवाह उस धीवर स्त्री से हुआ है और वो खुद एक कृषक परिवार से है।
ठीक है महाराज पर उसका समय हमे वहा जाके मिलेगा।
ठीक है, gilgamesh अपने घर से ठाकूर तक पहुचे तब तक हम उससे मिल कर आयेंगे ।
महाराज मैं नहीं आ सकता आपके साथ मुझे भी महासेन से मिलना है।
तुम्हारी और उसकी भेट तो जंग के बाद होगी गिलगामेश, मुरुगा और चंद्रशेखर से तुम्हे मिल लेना होगा ये राष्ट्र छोड़ने से पहले और जंग के समय तुम सिर्फ मुरुगा को ही जानते हो बाकी कोई तुम्हारी इस विषय में सहायता नही करेगा ।
ठीक है महाराज तो मुझे यहां फिर आना है क्या?
नही ठाकुर से मिल लेना वो तुम्हे अपने वैष्णव शिष्य के बारे में बताएगा जो साक्षात कबीर हो । माता हिंगलाज को मुक्ति में उसका योगदान रहेगा और तुम्हे तुर्वसु में अपना संसार बसाना है या वरका मैं यही सिर्फ तुम्हारी अपनी मर्जी होगी बाकी वो और मुरुगा जंग में तुम्हें सहायता करेंगे।
अभी कुछ और विशेष ज्ञान भी बाकी है महाराज जो ठाकुर जी से मिलेगा , हा बिलकुल , ध्यान रहे अपने अतीत को अपने जीवन में संतुलित रखना वो कभी भी तुम्हारे योगबल को हानि कर सकता है।
फिर वही बात , ठीक है महाराज, में आपसे फिर कहा मिलूंगा, में तुम्हे हिंगलाज के दरबार में थोड़ा समय दे पाऊंगा वत्स।
बाकी दुनिया भर में तुम्हे ही घूमना है।
ठीक है महाराज , जय बगलामुखी!!
जय बगलामुखी, गिलगामेश, विजयी भव।





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