मैं खरा शैव, भार्गव कभी वैष्णव ना ही ही सकते

तो तुम ज्योतिर्माठ जा पाओगे तो क्या करोगे ।
में अथर्ववेद में कुछ उपनिषद के साथ अध्ययन करके अपनी इस यात्रा का एक बड़ा हिस्सा वहा बिताना चाहता हु। और शंकरायचार्य जी से क्या कहोगे।
पूछूंगा की शैवो के लिए आगे क्या करना है।
क्या कभी विष्णुजी और भृगु ऋषि की काव्यमाता की कहानी सुनी है आपने, और तुलसी की कहानी इस सबसे विष्णुजी की महनता पर संदेह उत्पन्न होते है। आप का वैष्णव गुरु होने के नाते इस पर क्या विचार है।

तुम शायद भृगु गोत्र से हो क्या नाम बताया तुमने अपना।
 मेरा नाम इस ऐहिक जीवन मे शिवराज रखा गया है।
और आपका इस एहिक जीवन में क्या परिचय है।
मुझे लोग गिलगमेश नाम से जानते है ।
गिलगामेश ये अपने घर से मिला है या किसी गुरु ने दिया है।
ऐसा भी होता है क्या ?
मेरा तो घर से ही मिला हुआ नाम है पर वो कब और किसने रखा ये मुझे पता नहीं।
में तो बस जन्म से ये नाम लेकर अपना प्रवास कर रहा हु।
तो आप ने सच कहा में भार्गव हू। पर इसका विष्णु जी के भक्त को क्या लेना देना।
जो उदाहरण तुमने दिए वह एक बात है पर तुमने परशुराम का नाम सुना तो होगाही वो खुद भार्गव और विष्णु अवतार माने गए हैं इस पर क्या कहोगे ।
आप वैष्णव शत्रु को शस्त्र से कम और छल से ज्यादा हराते हो ।
हर एक युद्ध का समय और काल होता है शिवराज।
तुम 

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