ऊर्जा को संचित करो , अपने पथ और संबंध को पहचानो
वैष्णव आचार्य कोण है यहा।
जी कुछ काम है उनसे?
हा उनसे मेरा पोता मिलना चाहता है।
एक छोटे बालक को वैष्णव गुरु से क्या काम हो सकता है।
बोलिए मान्यवर मै हु गिलगमेश क्या सहायता कर सकता हु।
तुम माफ कीजिए आप यहां के गुरु है । आपने इस उम्र में ये सब हासिल किया है आश्चर्य है।
कुछ पद अधिकार से ज्यादा जिम्मेदारी के वजह से मिलते हैं मान्यवर । आपका परिचय बताईए।
मैं भगत सिंह एक अभागा पिता , मेरा बेटा टायसन मेरा मतलब तेजा और उसकी वाइफ किशोरी कुछ महीने पहले एक्सीडेंट में रेस्ट इन पीस होगए और ये मैक्स मेरे पास रह गया । अब मेरे पास दोही ऑप्शन है या तो नाना नानी के घर उसे भेजू या मे खुद संभालू।
में अकेला रह गया मेरी वाइफ भी नहीं रही।
मैक्स के नाना ने कहा उसे किसी गुरुकुल की शिक्षा में भरती करो मैं बोला ये तो chrstian है ये कायको गुरुकुल में पड़ेगा पर वो मान नही रहे थे और एक कक्षा उसे हमारे sfs स्कूल में भी पढ़ाया पर बच्चे को बहुत कुछ पसंद ही नही आ रहा था।
मैं उसके नाना के हात में देनेको जा रहा था उसे लेके पर रास्ते में रात hogayi और उसने कहा ये पढ़ लिया की यह विष्णव धर्म शाला है और ये मुझे लेके यहां।
।
आगया।
मैं भी हेल्पलेस महसूस कर रहा हु।
आप से कुछ उपाय हो सके तो बोलो ।
सर्वप्रथम आपके पुत्र और बहू को भगवान शांति दे ।
अनाथ के नाथ के नगर में आए हो तो निश्चिंत होकर रह जाइए और क्या नाम बताया मैक्स उसको कुछ पूछना है तो उसे आप मेरे साथ रख सकते है अगर आप को कोई प्राब्लम न हो तो।
आप के सहायता के लिए धन्यवाद । आप हमारे फादर जैसे ही लगे मुझे ।
ये यथा मां प्रपश्यंति तनस्तथा दरशम्याहम । तदतमान दृष्टुम इच्छा चैत मामेव शरणम् व्रज ।
इसका अर्थ क्या है गुरुवर्य ???
ये ऐसेहि मुझे घर पर भी परेशान करता है क्या बोला ये गुरुवर्य मींस टीचर ना??
हा मान्यवर।
बालक अपना नाम बताओ।
बताया तो है दादाजी ने मैक्स।
ये नाम सही है बालक ??
हा।
ये श्लोक तुम्हे किसने सिखाया बालक ।
मेरी मां ने,वो कहती थी तुम अपने परिवार को एक नई दिशा देने का कार्य करूंगा और वो प्रति दिन एक एक श्लोक सिखाती थी.
अद्भुत ज्ञान होगा तूम्हारे माता के पास बालक.
हा .
तो ये श्लोक तुमने अपने दादाजी की मेरे बारे मे बताने के लिये बोला या मुझे अपने बारे में बताने के लिए।।
आप भी अपार ज्ञान और अनुभव के धनी है गुरुवर्य।
जो आप ठीक समझो।
मैं आपके साथ ठीक हु ।
दादाजी आप विश्राम गृह के लिए जा सकते हो।।
ठीक है मास्टर जी। बस यहां भी अपनी क्लास मत बिठा देना ।y
स्कूल के सारे टिचरो की क्लास ले रखी है इसने।
लेके जाने को बोला था मुझे स्कूल से।
में तुम्हे किस नाम से पहचानु मैक्स ।
नाम में ही तो अक्षर ज्ञान होता है गुरुवर्य मेरी मां मुझको कबीर बुलाती थी में अभी मानता हूं कि कोई ज्ञानी व्यक्ति को में ये अधिकार दे सकता हु ।
बाकी मेरे जैविक परिवार तो मुझे उन्होंने दिए हुए अलग अलग नाम से पुकारते है। आत्म ग्लानी से
जैसे कि?
मैक्स , मास्टर जी, यतिम,
अमावस का ग्रहण, विनाश, अनाथ इत्यादि।
मास्टर जी में जा रहा हूं ठीक है।
ठीक है भगत सिंह।
दादाजी बोला करो बेटा ।
ठीक है दादा भगत सिंह।
चलो निकलता हूं।
ये नकारात्मकता होने के बावजूद तुम अपने आप को इस ज्ञान से परिपूर्ण कर रहे हैं लाजवाब है।
क्या फायदा ज्ञान का अगर मन आत्म ग्लानि से भर पड़ा है।
कबीरा ब्रम्हचरण से गुजर रहे हो तो थोड़ा सा अपने आप को समर्पण भाव से कुछ कार्य करने होता है
तुम्हे भी तुम्हारे दादा के साथ जाना चाहिए था।
हम मिलते रहेंगे।
आखिर किशोरी मेरी जानकारी में थी ये में मन लूं।
ठीक है गुरुवर्य ।
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