कालिका माता मंदिर

 कालिका माता मंदिर (अनंत नाग) :

गिलगामेश भक्त निवसातून बाहेर पडून पुढे जात होता आणि मंदिरापासून 100 ते 200 पावलांवर एक वृद्ध महिला त्याला पैशाची मागणी करू लागली . एवढ्या मोठ्या मंदिराजवळ ती एकच स्त्री दिसत होती आणि गिलगामेश ने त्याच्या खिशात हात घातला तर खिसा रिकामा सापडला . मोबाइल सुद्धा त्याला आठवते तसे तो रूम मध्ये विसरला असे त्याला कळले.

त्याला पुढे जावे आणि मंदिरी दर्शन घ्यावे की रूम ला परत जाऊन पैसे आणि मोबाइल घेऊन परत यावे याविषयी संभ्रम निर्माण झाला . पन त्याने जास्त विचार न करता मंदिर गाठले आणि पाहतो तर काय तीच स्त्री एक लहान मूल घेऊन जो तिच्या नातवाच्या वयाचा होता त्याला दिवा लावण्यास मदत करत होती. आणि तो नातू दिवा वाती आणि तेल यातच मग्न होता असे त्याला दिसले त्याने त्यांना भेटण्याचा बोलण्याचा प्रयत्न करणार तेवढ्यात मागून कोणीतरी आवाज दिल्यासारखे त्याला जाणवले गिलगामेश कोण हे यहा पर!!!

तो मागे वळून बघतो तर एक 6 फुट ऊंची असलेला धिप्पाड तरुण त्याने बघितला आणि त्याने जे पोशाख आणि पेहराव घातला तो जणू काही एक शक्ति उपासक होता आणि त्या मागे त्याच्या ओळखीचा तो शिव उपासक त्याला दिसला जो बस मध्ये प्रवासात तीच्या सोबत होता आणि रामानंद पर्यन्त तो जेव्हा वृंदवनात त्याच्या सोबत गेला होता.

अरे शिवराज जी यह जगह तो मंदिर ही देवी का और आप यहा. इनसे मिलो ये विक्रम जी हे यहा के कुछ शक्ति उपासक जो हमारे कार्य मे सहाय्यता के लीये उपलब्ध हे उन्मे से एक समझो . बाकी हिंग्लज माता के मंदिर मे भी ये जाया करते हे अगर तूम चाहते हो तो तुम ऊनके साथ यहा से निकल के वहा तक अक सफर कर सकते हो .

वो माताजी कोण हे उन्होने मुझे पैसे मांगे पर मे यह जगह तक पहुच आया तो मेरे पहले वो यहा थी और वो बालक कोण हे .

कहा - उस कोणे मे ?? हा .

गिलगामेश जी अगर आपको कोई शंका ही तो आप खुद ऊन माताजी को जाके मिल सकते हो . हम आपके विश्राम गृह मे आपका इंतेजार करेंगे . जैसा आप ठीक समझे पर मे मोबाइल औए पाकीट रूम पर रख आया हू 100 रुपये ची नोट देत तो तरुण म्हणाला मुझे लगता हे की इसमे आपका काम होजाएगा काम खतम करके जलदी आ जाणा .

मग गिलगामेश त्या महिलेजवळ गेला आणि बोलला माताजी ये मेरी तरफ से आप के लीये बाहर मेरे पास कुछ भी नाही था पर मंदिर मे आते ही मेरे दोस्त मुझे मिले और मे आपको ये दे पा रहा हू .

ये सच मे अगर तुम्हारा नही हे तो इसका पुण्य तूम्हे नही मिलेगा ऐसा तुम्हे लगता हे या नही . हा वो तो सही हे पर मुझे लगा आप को इसमे आज का काम होजाएगा मंदिर मे आये हो तो अपनी खुद की कोई चीज तुम्हे देणी चाहिये मंदिर के बाहर अगर तूम ये देते तो हम लेभी लेते लेकिन अब तूम मंदिर के अंदर हो.

क्या मांगती हो माताजी ?

क्या दे सकते हो?

ये बालक कोण हे , ये मेरा पोता या सेवक ही समझलो .

क्या नाम हे इसका ?

नामदेव नाम हे इसका और मेरे साथ उसके जन्म से हे .

माता पिता कहा रहते हे इसके?

अभी नही हे .

कुछ इतिहास इसकी वजह . काश्मीर का इतिहास कोई बताने की चिज नही हे . ओह मे समझ रहा हू .

पर आगे क्या ? अब बडा होके ये क्या करेगा?

जो तूम कर रहे हो कहा से आये हो कहा जा रहे हो तुम्हे खुद को पता चल रहा हे क्या ?

आपको क्या पता हे उसके बारे मे ?

क्या दान दोगे गिलगामेश ?

आपको मेरा नाम कैसे पता ?

अभी जिससे तुमने ये पैसे लीये वो तुम्हारा ही तो नाम लिया था बाकी तो रोज आया करते हे यहा .

ऊनका तो जीवन यहा समर्पित हे , तूम क्या समर्पित करोगे गिलगामेश.

मे भी अपना जीवन यहा समर्पित कर सकता हू माताजी .

तूम अपने दिये गये बाकी वचनो को भी याद करलो , कीसिका आवाहन करने पे उसके प्रती समर्पण कर दोगे तो आगे नही जा पाओगे, वचन हमेशा सोच समज के देना चाहिये .

माते! आपके दिव्य वचन मुझे समझ तो आगये हे पर मुझे आपकी कुछ सेवा का आदेश दे दीजिए आगे मे अगर उसे पूर्ण कर सकु तो मे आपको वचन दे दुंगा . वनवास और युद्ध प्रवास मे एक बुनयादी फरक ये होता हे गीलगमेश की वनवासीयो को हमेशा अपने जन्मभूमी की याद आति हे पर युद्ध प्रवासी पूर्ण रूप से किसी भी प्रकार के भावणाओ से रहित काम करते हे मुझे वचन चाहिये की आगे जितने भी प्रवास तूम करने वाले हो उसे तूम एक युद्ध प्रवासी के तरह ही जिओगे .

आप इतना कुछ जाणती हो माते आपका परिचय ?

इतना कहतेही उस महिला ने देवी गर्भगृह के ओर अंगुलीनिर्देश किया और गिलगमेश ने ध्यान से देख कर वो समझ गया की माता (कालिका माता ) उसको दृष्टान्त दे रही थी .

वो छोटा बालक वहा से अंतर्धान होगया था और माता आब मूर्ती के रूप मे ही बोल रही थी गिलगामेश यहा तक तूम पहुचे हो इसका मतलब तुम्हे आगे जाणे का बाल प्राप्त हो जाएगा और मेहनत से ही जंग जिती जाते ही पर आगे तुम्हे खास दृष्टी की जरूरत होगी .

तुम्हे ये वचन निभाणे तक ये दृष्टी मिलेगि की तूम अपने पूर्व के योग अभ्यास से ओर किसी भी जातक या भूमी के संपर्क से ये तुम्हे ज्ञात होजायेगा की उसके बहुत और वर्तमान जो तूम नही जाणते वो जान जाओगे .

अगर वो ज्ञान तूम्हे तुम्हारे कर्तव्यो से परे ले जाये तो तुम्हे भावणाओ का सहारा लेना पडेगा पर ये कलह् भी उसके साथ आयेगा क्या तुम्हे ये स्वीकार हे गिलगामेश .

हा माते एक बडे आयोजन का हिस्सा होणे के नाते जो भी कलह मेरे सामने आएंगे ऊनका निष्पक्ष आकलन कर सकु ऐसी दृष्टी की मे अपेक्षा करता हू .

माता ने तथास्तु बोल और वो भी अंतर्धान हो गई. गिलगमेश ने गर्भगृह की मूर्ती को नमस्कार किया और वो मंदिर से बाहर निकल के आया तो वो माता जी बाहर मिली तो गिलगमेश ने ऊनके भी पाव छुये और 100 रुपये माताजी को सोप के वो आगे निकल कर वो विश्राम गृह मे उसका इनतेजार कर रहे शिवराज और उसके शक्ति उपासक दोस्त को मिल कर आगे की योजना प्रारंभ की .                                   

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