देव बनोगे या ऋषी (नबी बनोगे या रसूल)


आविष्कार
गिलग़मेश कहो कैसे आना हुआ इस हिंदुकुश के पहाड़ों में काबुल नदी का पानी पीने का मन किया शायद।
नहीं हम तो मंजिल के मिल के पत्थर की तरह इन वादियो को निहार रहे है।
642 ईसा के बाद कोई बुदपरस्त को यह नजारा देखने को ना डर लग रहा है न उसे लड़ाई का शोक लग रहा है।
ये बाते आम तो नहीं हैं।
अपने भूत की गलतियों से क्या लड़ाई जनाब । अफीम की खेती और ईसाईयों की गुलामी में जो जमीन बंजर बनी हो उस जगह और क्या कोहराम मचाने की जरूरत।
बात तो कड़वी सच्चाई है पर हम भारत बाबा आदम की भूमि मानते है और भारतीय को इज्जत देते है इसलिए काफिर होके सामने खड़े हो।
ये लड़ाई का वक्त है ऐसा लगता है आपको ?
पर बाते जरूरी भी लग रही है क्या आपको?

इसी बात का फायदा अंग्रेजी शेपर्ड लोगों ने लिया मियां और पंडित ।
राम राम प्रल्हाद जी । वालेकुम अस्सलाम जहीर मियां क्या हालचाल।
अभी तो जरूरी सेवाएं प्रदान कर सकते है। और इस पंडित को कहा भिजवाना है ।
ये खुद को वर्का के राजा मानते है भाई । उन्हें वहां तक पहुंच पाना आसान हो ऐसी हमारी कोशिश रहेगी।
और ये कौन है । शक्ल से शेपर्ड ही लगता हैं l हिंदी/ उर्दू आती है क्या इस अंग्रेज को ।
हां बिल्कुल 2 साल राजस्थान में पढ़ाई की है जहीर जी हमने ।
नाम क्या बताया son आपका ।
प्रताप पार्कर।
ये तो कन्फ्यूजन है । आपको में सन पार्कर बोलूंगा आपके लोगों के (अमरीकन ) बहुत ज्यादा एहसान है हम पर हम जो अभी हथियार और गाड़ी चलाने वाले बने है ये गोरों की ही तो देन हैं।
वरना अभी भी अफीम की खेती और , कुछ करके अपना गुजारा कर लेते थे हमारे दादा परदादा ।
आपकी बाते सुनकर ना हंसी आई न ही प्राइड फील हुआ बस रामानंद जी के वो बोल याद आए ।
अब हिंदी प्राइड बनी है और इंग्लिश मजबूरी क्योंकि में इंग्लिश इलाकों में नहीं हु।
चलो तुम्हे तुम्हारी भाषा का फायदा तो पता है ये अच्छी बात है।
Ya it's world language।
कंधार से ईरान के जरिए जाना होगा कोई शिया है पहचान में प्रल्हाद जी ?
है एक अली जिसका दादा ज़ोहराष्ट्रियन था ।
मतलब उम्र से छोटा होगा हमसे। हां हमारे पिता और उसके दादा की पहचान थीं अभी कारोबार संभाल रहा है बच्चा।
पर इनकी मदद वो कर पाएगा कि नहीं।
अरे ये तो पहली किश्त है ।
इनका आना जाना लगा रहेगा हर मिल के पत्थर पर ।
हर बार नए तरीके से जंग ए आजादी इनको लड़नी होगी।
तो ये भटक न जाएं प्रल्हाद जी ।
हर वनवासी को तुम राजा बना पाओगे या नहीं ये तो पता नहीं लेकिन तुम्हे आपा नहीं खोना है ये ध्यान रखना ग़िलगमेश।
मतलब ।
मतलब ये कि आप हर व्यक्ति को खुश नहीं रख सकते हो ये तो तय है । पर किसे खुशी देनी है ये तुम्ही को तय करना होता है।
राजा का मूल रूप देव / भगवान जैसा है मतलब हर व्यक्ति को भगवान से आशा होती है कि उनकी इच्छा वो पूरी करेगा ।
इसके विपरीत अगर व्यक्ति कुछ बुरा करे जिससे समाज को हानि हो उस वक्त एक शक्ति खड़ी होती उसका नाम ऋषि ।
इस्लाम में भी नबी और रसूल का जिक्र है।
25 नबी तो हर व्यक्ति को भगवान जैसे ही लगेंगे पर रसूल अलग था वो आखिरी पैगम्बर समझलो उसने पूरी नबी के नींव को हिला कर रख दिया और उसके बोले शब्दों को जिन्होंने किताब में कैद किया उन्होंने उसमें वो बदलाव डाले जो किसी को भी न तो जायज लगने चाहिए नहि आज वो पूरी तरह से उपयोग में लाए जा सकते है।
इसलिए वो बुराई का अंत समझ सकते हो।
एक बात फिर ध्यान रखना ग़िलगमेश 
आज तक का ईतिहास उठा के देखो
वरदान हमेशा देवो ने दिये और शाप हमेशा ऋषीयो ने ,शायद इसिलिये सामान्य मनुष्य दुसरो मे भगवान ढूंढता है ऋषी नही
मतलब ज्ञान के साथ जिसके पास दुसरो का भला करने का नजरिया जरुरी होता है
ये भी शायद आपके पिता के वचन होगे।
हा बिल्कुल।
जहीर भाई इनका हर देश में एक बैंक खाता खोलने तक का काम कर पाओगे।
किसी नल कुबेरम का संदेश पहुंचा है कि हर जगह इनकी उपस्थिति के साथ इनका पैसों का भुगतान उन्हीं देशों के चलन में और इन्हीं के नामों से होगा।

पाकिस्तान आप बनाऐ हम अफगानिस्तान देखेंगे अली को ईरान देदो , इराक में इन्हें खुद ढूंढने दो।
जरूर !!! आपको हम इसी सादगी के लिए पहचानते है जहीर भाई।
तुम्हे वाणिज्य के विषय में हमारी मदद मिलती रहेगी ग़िलगमेश।
अध्यात्म तुम्हारा विषय है और शासन एक गंभीर विषय है।
तीनों को संतुलन बनाने में सक्षम होना आवश्यक होगा।
जी प्रल्हाद जी आपके गुरुतुल्य सहकार की हम कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
जहीर भाई इनका इंतजाम होटल में करेंगे या घर में।
अगर  2हफ्ते से कम की बात है तो घर ठीक रहेगा ।
वैसे जैसा आप बोले ये आते जाते रहेंगे तो इन्हें होटल में रखने का ज्यादा सही तरीका नहीं होगा ।
काफिरों को बचाके रखना पड़ता है प्रल्हाद जी ।
आप तो राजवंशी हो।
इन्हें कोई नहीं पहचानता।
हा वो भी सही है।
गिलगामेश जहां पर तुम्हे अपनी जगह लगे वहां अपने लोग जमा करो प्रताप को हर व्यक्ति को सही पढ़ने और सही काम पे लगाने दो ।
ठीक है ।
कल फिर मिलेंगे ।
आगे अली से मिलने जाना है । तैयार रहना ।
ठीक!!


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