Guilt - अपराधबोध - पश्चात्ताप --
बोहोत दिनों बाद आए हो प्रल्हाद चाचा क्या पैगाम लाए हो ।
अली इनसे मिलों ये गिलगमेश और प्रताप है भारत से आए हे ।
भारत से यहा मुस्लिम लोगों के देश मे कैसे आना हुआ इनका कोई खास मकसद ।
इन्हे वरका जाना है तो तेहरान का रास्ता जरा आसान लगा हमे और सोचा तुमसे भी मिल लू ।
ये ठीक बात की आपने चचाजी बाकी कारोबार तो ठीक चल ही रहा है सोच रहा था कोई गाड़िया ले लू और सवारी या माल का ट्रांसपोर्ट का धंदा चालू करू क्या आपको कोई गाड़ी चलानी आती है जनाब ।
हा मे चला लेता हु सवारी की गाड़िया ।
तो ये हमारे काम मे मददगार होंगे चचा आप बेफिक्र होकर इनको हमारे साथ ईरान / इराक मे घूमने दे सकते है और जबे चाहे ये बलोच या भारत भी जा सकते है बोलो आपको कैसा लगा मेरा सुजाव ।
अब तुम इतना बेबाक और सोच विचार करके बोल रहे हो तो मुझे कोई आपत्ति नहीं ।
मुझे ज्यादा सोचने की आदत नहीं है चाचा मे बस एक बार सोचू और कर डालु ।
गिलगमेश भाई इसे संभालना है तुम्हें तुम्हारी उम्र से छोटा है पर बड़े सपने होने के कारण आज अकेला महसूस करता है इस दुनिया मे ।
ऐसा कुछ नहीं है चाचा सोहा आज भी मेरे साथ है और अब्बा इस दुनिया मे है बस मूलकात नहीं होती ।
क्या करता है शापूर मेरा मतलब शहजाद अब इसरा के जाने के बाद ।
कुछ नहीं अपनी जगह पे रहते है मस्जिद के पास हम यह तेहरान की बड़ी इमारतों मे और वो रेगिस्तान के पास । उन्हे शायद अब भीड़ पसंद नहीं ।
मतलब शापूर was earlier name then conversion happend & it become शहजाद is it correct ?
प्रताप वो हम बाद मे भी पुछ सकते है आराम से । आप बड़े तेज लगते हो प्रताप पर चेहरे से गोरे साहब लगते हो ।
हा वो प्रताप पार्कर है 2 साल राजस्थान मे पढ़ाई करने भेज दिया था मा बाप ने तो थोड़ी बहोत हिन्दी की समझ है वरना सब जगह चुप ही रहते ये जनाब ।
भारत की बोली सुनकर कैसा लगता है प्रताप । अब मे समझ गया हु की भाषा अधिवास का सबसे महत्वपूर्ण अंग है ।
अगर मे आजूबाजू की भाषा न सीखु और ये चाहू के मेरा सब काम ठीक से हो तो ये नामुनकिन लगता है अब ।
चलेगा हम इस बात का खयाल रखेंगे गोरे साहब । और गिलगमेश एक इतिहास और पर्यटन के विद्यार्थी है तो तुम उनको सही काम दे रहे हो । प्रताप पूरा managment देख लेगा टुरिज़म का ।
ठीक है और होटल / खाने का विशेष ध्यान रखना गिलगमेश का वो शाकाहारी है । ठीक है सोहा भी शाकाहारी है वो ध्यान रखेगी चाचा ।
बाकी इसरा का जाना बोहोत दुख की बात है पर अब उसे उभरना होगा । किसी guilt मे तो नहीं है वो । कह नहीं सकते चाचा वो किसी बात का जिक्र तो नहीं करते पर सोहा जैसे मेरी मा भी पारसी ही थी । शायद कोई अनबन हो ।
जिंदगी के 25 साल साथ बिताने के बाद कैसी अनबन । शापूर तुम्हारे जन्म से पहले ही इस्लाम काबुल किया था ।
पर इसरा को इसका कुछ खास फरक नहीं पडा अब जब तुम्हें settle होता देख उसे खुश होना चाहिए था ।
देखो चाचा ये धर्म की बातों से मे दूर रहता हु । शायद उनकी इमाम की नोकरी मे न कर पाउ ।
इतना भी बुरा नहीं था वो । की अपनी बात पे अड़ा रहे ।
दुनिया बाजार है और लेन देन मेरा काम चाचा ये बाते मेने अब्बा से दस से ज्यादा बार दोहराई होगी । पर....
ठीक आपसी मतभेद सुलझा लोगे ये उम्मीद करता हु ।
मेरा भी एक दोस्त था मुरुगा नाम था उसका उसने भी अपने मा बाप का साथ छोड़े बोहोत समय हुआ है , वो भी खुदकों ज्यादा खुश नहीं देखता होगा ।
मुरुगा किसी तंजावूर मे रहता है क्या ?
हा तुम्हें कैसे पता ?
वो हमारे ईरानी दोस्त इराक मे धंदा करते है वो बोलते है , भारत का मतलब मुरुगा इतना बडा नाम है धंधे मे मुरुगा ।
वो भी धंदा करता है या ??
नहीं वो गैट्कीपर समझलों ,कस्टम का ऑफिस संभालता है , शायद उसने भी रिस्क और अपने ससुर के कारण परिवार से दूरी बनाई होगी ।
ओके तो ये बात है ।
आखिर बार कब मिले थे उससे ।
कुछ 5-6 साल पहले ।
ठीक है , कभी मुलाकात होगी तो देखेंगे जनाब को ।
अपने परिवार से दूरी बनाने का कोई पछतावा नहीं होता आपको ।
प्रताप कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है । पर मन करता है बहुत बार की सब छोड़ के एक बार मिल लू ।
सब छोड़ने की क्या जरूरत है अली लौकिक और पारलौकिक दोनों का balance रहना चाहिए ।
अपने बाप की तरह बाते करने लगे हो । ये सब धंधे को जोखिम मे डालने जैसा है । बाप का धंदा तो चला नहीं अभी तुम तो दादा का धंदा संभालो ।
हर घर मे तुम्हारी एक तो चीज होनी चाहिए न । यही बोल गया था तेरा दादा तुझे याद होगा ।
तो शापूर की गलती क्या थी अब समझ या रहा है उसका दर्द कोई नहीं बाट सकता क्योंकि तुम तो अपनी दादा की अमानत संभाल रहे हो जो वो न कर सका ।
हम मिलना चाहेंगे आप के पिताजी से । गिलगमेश रेगिस्तान के लिए तुम्हारा पहला सफर तय हुआ , चाचा आप भी जाना चाहोगे । अली कैसे तुम्हारे बिना हम वह जगह पोहोच पाएंगे तुम्हें समय निकालना होगा । जैसे गिलगमेश ने कहा कुछ दिन की रजा लेलों और चलो ।
मे सिर्फ 2 दिन दे पाऊँगा चाचा । जुम्मा और शनिश्चर । तयारी करो , लगे तो शहजाद को बलोच लेकेजाऊंगा ।
वो तकलीफ कोई न करे चाचा अपना रेगिस्तान और घर वो नहीं छोड़ेंगे ।
चलो मजाक कर रहा था ।
तुम्हें किसी बात का अफसोस है अली ?
हा मेरी माँ को जब मे आखिरी बार मिलने गया था तो उन्हे साथ लाने वाला था पर नहीं ला सका, वो नहीं आई और अभी भी अब्बा को नहीं ला सकूँगा ।
तुम किसी ऐसे मोके मे फसे हो गिलगमेष ?
एक था जब मेरे गुरु ठाकुरजी ने मुझे संभाला था और कहा था अनाहत से ऊपर उठो मतलब दिल से दिमाग तक जाने के लिए जबान संभालो । दिमाग को भी जितना होता है तभी हम अपने आप को किसी तनाव से बाहर निकलने मे कामयाब होते हो ।
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