जहाँ बहस खत्म होती है, ज़िंदगी शुरू होती है

अली का HQ — 

दृश्य १ — वह ख़ामोशी जो सबसे ज़्यादा बोलती है

प्रह्लाद की आखिरी बात हवा में लटकी थी —

"कोई जरूरत लगती है तुम्हें?"

और शहजाद का जवाब —

"नहीं। बिल्कुल नहीं।"

दोनों के बीच एक ऐसी चुप्पी थी जो सालों की थकान से भरी थी। यह बहस नहीं थी। यह दो टूटे हुए इंसानों का आमना-सामना था — एक जिसने परिवार खोकर धर्म बचाया, दूसरे ने धर्म के नाम पर परिवार को cage में बंद किया।

अली एक कोने में खड़ा था। उसकी पत्नी ज़ारा उसके पास थी — उसका हाथ धीरे से थामे हुए। ज़ारा की आँखें शहजाद पर थीं। वह पढ़ रही थी उस आदमी को — जो उसका ससुर था, जो उससे कभी ठीक से मिला नहीं था।

पाशा दरवाज़े के पास था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यहाँ कौन जीत रहा है और कौन हार रहा है। सब कुछ बहुत complicated था।

तभी HQ का पिछला दरवाज़ा खुला।

गिलगमेश अंदर आया — हाथ में एक file थी, कान में earphone था, और चेहरे पर वह expression था जो तब होता है जब कोई एक साथ तीन calls handle कर रहा हो।

वह रुका।

कमरे का माहौल पढ़ा। दो सेकंड।

Earphone निकाला। File नीचे रखी।

गिलगमेश: (शांत, लेकिन कमरे को address करते हुए) "चाय बनाऊँ?"

दृश्य २ — गिलगमेश की नज़र

कोई नहीं बोला।

गिलगमेश ने किचन की तरफ जाकर खुद चाय बनाना शुरू किया। उसने आवाज़ दी बिना किसी की तरफ देखे —

गिलगमेश: "शहजाद साहब, आपने Zand Avesta का ज़िक्र किया था ना?"

शहजाद चौंका। "तुम... तुम सुन रहे थे?"

गिलगमेश: (चाय छानते हुए, पीठ किये) "HQ में आवाज़ें गूँजती हैं। लेकिन मैंने Tourism में एक चीज़ सीखी है — जब दो लोग किसी destination के बारे में argue करते हैं, तो असल बात यह नहीं होती कि destination अच्छा है या बुरा। असल बात यह होती है कि दोनों उस destination को बहुत deeply care करते हैं।"

उसने चाय के कप मेज़ पर रखे।

गिलगमेश: "आप दोनों Iran को care करते हैं। इस्लाम को care करते हैं। हिन्दुस्तान को care करते हैं। बस रास्ते अलग हैं।"

शहजाद: (कड़वाहट से) "Tourism वाले philosophy नहीं समझते।"

गिलगमेश: (मुस्कुराते हुए, बिना offense लिए) "साहब, मैं वह आदमी हूँ जो Ajanta की caves में जाकर रोया है। जो Hampi के खंडहर देखकर घंटों बैठा रहा। Tourism को लोग vacation समझते हैं। मैं उसे civilization का dialogue मानता हूँ।"

एक पल की ख़ामोशी।

गिलगमेश: (शहजाद की आँखों में देखते हुए) "और साहब, Cyrus the Great — जिनका ज़िक्र Zand Avesta की परंपरा में आता है — उन्होंने दुनिया का पहला Human Rights Charter लिखा था। उन्होंने यह नहीं कहा कि सिर्फ एक रास्ता है। उन्होंने कहा — जो लोग मेरे राज्य में हैं, वे अपना धर्म मानें, अपनी भाषा बोलें। यही था उनका Iran।"

शहजाद की आँखें कुछ बदलीं। बहुत कम। लेकिन बदलीं।

दृश्य ३ — प्रताप आता है

प्रताप ऊपर की मंज़िल से उतरा। उसके हाथ में एक notebook थी।

उसने कमरे को scan किया — HR वाली नज़र से। Body language पढ़ी। Tension map किया।

वह सीधे प्रह्लाद के पास गया। धीरे से बोला।

प्रताप: (सिर्फ प्रह्लाद के लिए, धीमी आवाज़ में) "तुमने बहुत कुछ कह दिया आज।"

प्रह्लाद: (थकी आवाज़ में) "जो सच था वह कहा।"

प्रताप: "सच हमेशा एक बार में नहीं कहा जाता। HR में पहला lesson यही है — timing matters। Content नहीं, context matters।"

प्रह्लाद ने उसे देखा।

प्रताप: "तुमने शहजाद को आज बहुत unpack किया। अच्छा किया। लेकिन अब वह vulnerable है। इस moment में अगर उसे push किया तो वह बंद हो जाएगा — हमेशा के लिए।"

प्रह्लाद ने एक लंबी साँस ली।

प्रताप: "अब मेरी बारी है।"

दृश्य ४ — प्रताप और शहजाद

प्रताप शहजाद के सामने बैठा। सीधे। बिना किसी पुराने रिश्ते का बोझ लिए — क्योंकि उन दोनों के बीच कोई पुरानी कहानी नहीं थी। यह पहली मुलाकात थी।

और यही उसकी strength थी।

प्रताप: "शहजाद साहब, मैं प्रताप हूँ। HR में हूँ। आपसे कुछ पूछना था — professional नज़रिए से।"

शहजाद ने उसे देखा। यह नया चेहरा था। न दुश्मन, न दोस्त।

प्रताप: "आपने कहा — आपके 56 लोगों से आप confession कर चुके हैं। मतलब आप बात कर सकते हैं। आप share कर सकते हैं। यह बहुत rare quality है एक leader में।"

शहजाद को यह expect नहीं था।

प्रताप: (आगे बढ़ते हुए) "HR में हम कहते हैं — जो आदमी 56 बार confess कर सकता है, वह डरता नहीं। वह actually बहुत strong है। लेकिन उसी आदमी ने कहा — 'बिल्कुल नहीं, कोई जरूरत नहीं लगती।'"

प्रताप ने notebook खोली। उसमें कुछ था — लेकिन उसने पढ़ा नहीं। बस सामने रखा।

प्रताप: "यह contradiction है साहब। एक side में वह आदमी है जो 56 लोगों से बात करता है। दूसरी side में वह आदमी है जो कहता है कि उसे किसी की ज़रूरत नहीं। इन दोनों में से कौन सा असली शहजाद है?"

लंबी चुप्पी।

शहजाद: (धीरे, जैसे पहली बार खुद से बात कर रहा हो) "जो 56 लोगों से बात करता है... वह थका हुआ है।"

प्रताप: (बिल्कुल शांत) "हाँ। और थका हुआ आदमी अगर यहाँ बैठकर थोड़ी देर रुके — तो कोई बुरी बात नहीं।"

दृश्य ५ — अली की बात

अली अब आगे आया।

यह उसका HQ था। यह उसके पिता थे। यह उसकी ज़िंदगी थी।

अली: "अब्बा।"

शहजाद ने बेटे को देखा।

अली: "आपने कहा — मेरा आपसे कुछ खास मतलब नहीं रहा जब से मैं दादा और अम्मी के साथ गया।"

शहजाद चुप।

अली: "अगर वाकई ऐसा होता — तो मैं बंकर तक नहीं आता। मैं यहाँ खड़ा नहीं होता।"

ज़ारा अली के पास आई। उसने शहजाद को देखा — सीधे, बिना डर के।

ज़ारा: "अब्बाजान, मुझे नहीं पता आपने क्या खोया है। लेकिन जो आपके पास है — अली है — वह खोइए मत।"

शहजाद की आँखें भर आईं। उसने रोका। लेकिन पाशा ने देखा।

दृश्य ६ — पाशा का सबसे बड़ा सवाल

पाशा अब तक चुप था। लेकिन उसने एक बात सुनी थी जो उसके दिमाग में घूम रही थी।

"मिशन पर मरते हैं... ज़िंदा फट जाते हैं... जहाज़ों में मरते हैं..."

शहजाद ने यह बात इतनी आसानी से कही थी — जैसे मौत एक routine हो।

पाशा धीरे-धीरे आगे आया।

पाशा: (शहजाद से, डरते हुए लेकिन पूछते हुए) "शजाद भाई... वे लोग जो जहाज़ों में मरे... क्या हम उनके लिए ज़िम्मेदार हैं?"

कमरे में एक और तरह की चुप्पी छा गई।

यह चुप्पी philosophical नहीं थी। यह चुप्पी बहुत concrete थी।

शहजाद: (बहुत धीरे, लगभग खुद से) "ऑपरेशन में... losses होते हैं पाशा।"

पाशा: (आवाज़ थोड़ी काँपती हुई) "लेकिन वे हमारे ही लोग थे।"

गिलगमेश: (बीच में, लेकिन judge करने के लिए नहीं — बस एक fact की तरह) "और जो बच गए — वे उसी बाजारपुर में हैं। उनके बच्चे हमारे साथ काम कर रहे हैं।"

शहजाद ने गिलगमेश को देखा।

गिलगमेश: "साहब, आपके लोगों ने जो खोया — वह हम वापस नहीं ला सकते। लेकिन उनके परिवारों को जो मिलना चाहिए — वह अभी भी दिया जा सकता है। उनके खेत हैं। उनके हाथ हैं। हमें उन हाथों की ज़रूरत है।"

यह offer था। लेकिन इसमें कोई deal नहीं थी। कोई condition नहीं थी। बस एक रास्ता था।

दृश्य ७ — प्रह्लाद और शहजाद — आखिरी बात

सब थोड़ा पीछे हट गए।

प्रह्लाद और शहजाद — फिर आमने-सामने। लेकिन इस बार माहौल अलग था।

प्रह्लाद: (बहुत धीरे, पुरानी आवाज़ में जो university के दिनों की याद दिलाती थी) "शापुर... मैंने आज बहुत कुछ कहा। जो नहीं कहना चाहिए था, वह भी कहा।"

शहजाद ने प्रह्लाद को देखा — 'शापुर' सुनकर। वह पुराना नाम।

प्रह्लाद: "लेकिन एक बात जो मैं कहना भूल गया — तुम आज भी वही हो जिसे मैं debate में seriously लेता था। तुम आज भी वही हो जो सोचता है। बस यह सोच किसी और दिशा में जा रही है।"

शहजाद: (पहली बार बिना defence के) "मैंने बहुत कुछ खोया है प्रह्लाद।"

प्रह्लाद: "मैं जानता हूँ।"

शहजाद: "तुमने भी।"

प्रह्लाद: "हाँ।"

एक लंबी, भारी ख़ामोशी।

शहजाद: "तुमने दोबारा शादी क्यों नहीं की?"

प्रह्लाद: (हल्की कड़वी हँसी के साथ) "क्योंकि अभी तक एक काम बाकी था।"

शहजाद: "कौन सा?"

प्रह्लाद: (अली की तरफ इशारा करते हुए) "यह।"

दृश्य ८ — HQ की रात

रात हो गई।

HQ के बाहर का शहर सो रहा था। अंदर अभी भी एक बल्ब जल रहा था।

गिलगमेश अपने laptop पर था — Rajasthan circuit का नया proposal बना रहा था। बाजारपुर का नाम उसमें था।

प्रताप notebook में कुछ लिख रहा था — कल के तीन नए लड़कों के लिए एक training plan।

ज़ारा किचन में थी — रात के खाने का इंतज़ाम।

अली whiteboard पर खड़ा था — एक नया route।

पाशा रहीम चाचा के पास बैठा था। दोनों चुप थे। लेकिन वह चुप्पी पहले वाली नहीं थी।

और शहजाद — वह दरवाज़े के पास अपनी वही पुरानी कुर्सी पर था। लेकिन इस बार उसकी पीठ दरवाज़े की तरफ नहीं थी।

इस बार वह HQ के अंदर देख रहा था।

प्रह्लाद उसके पास आकर बैठा।

शहजाद: (बिना कोई बड़ा drama किए, बस एक थके हुए इंसान की तरह) "मुझे नहीं पता कि मैं यहाँ fit होता हूँ या नहीं।"

प्रह्लाद: "कोई fit होकर नहीं आता शापुर। सब बनते हैं यहाँ।"

शहजाद: (पहली बार उस नाम पर resist नहीं किया) "शापुर बहुत पुराना हो गया।"

प्रह्लाद: "हाँ। लेकिन कभी-कभी पुराने नामों में जो आदमी था — वह अभी भी ज़िंदा होता है।"

उपसंहार — अगली सुबह का पहला काम

अगली सुबह।

HQ के whiteboard पर एक नया नाम लिखा था —

करीम — बाजारपुर। मिर्च + Tourism pilot।

यह शहजाद ने लिखा था। रात को। जब सब सो गए थे।

वह करीम — जिसका बेटा शहजाद के साथ था, जो खेत छोड़ गया था।

शहजाद उसे वापस नहीं ला सकता था। लेकिन उसके खेत को ज़िंदा कर सकता था।

गिलगमेश सुबह सबसे पहले आया। Whiteboard देखा। मुस्कुराया।

गिलगमेश: (किसी से नहीं, बस खुद से) "Destination नहीं बदलती। Journey बदलती है।"

प्रह्लाद ने धर्म बचाया परिवार खोकर। शहजाद ने परिवार को ideology में ढाला। गिलगमेश ने हर खंडहर में ज़िंदगी देखी। प्रताप ने हर टूटे इंसान में एक team member देखा। अली ने बस एक HQ बनाया — और उम्मीद रखी कि एक दिन सब यहाँ आएंगे।

वह दिन आ गया था।

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